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लेख – धर्म के आड़ मे हो रहे गलत काम को धर्म का हिस्सा बनाने में लोग मानसिक रूप से क़ामयाब हो जाते हैं


आज डा.वाघ की वाल पर हम कल की ही बात को आगे बढा रहे है ।  सन अस्सी की दशक मे अभिताभ बच्चन की फिल्म जादूगर आई थी । उस फिल्म मे अमरीश पुरी जादूगर से अपने फायदे के लिए महात्मा का चोला पहनकर ग्रामीण जनता को ठगता है । फिल्म मे बच्चन हीरो बनकर वहा के लोगो को बचाते है और बताते है की यह कोई महात्मा नही जादूगर है लूट रहा है ।  कमोबेश ऐसी ही कहानी यहा भी बनाने की कोशिश की गई और चर्चा मे भी आ गई ।  पर दुर्भाग्य से स्क्रिप्ट ही गलत हो गई  ।  छोटे मोटे तांत्रिक तक की रेड व छापा कुछ हद तक सफलता दिला ही देता था ।  पर अब नब्ज भांपने मे गल्ती हो गई।  वही ऐसे को चैलेंज हो गया जिसे सिद्धी मिली हुई थी । वैसे बात बढ गई थी तो सम्हाली भी जा सकती थी ।  अपनी जिज्ञासा की व अंधविश्वास की परीक्षा के तहत बाबा से अनुरोध कर उसे यह परख कर मामला वही खत्म कर देते ।  पर ऐसा न कर सीधे सीधे चुनौती ही दे डाली ।  मामला भी मीडिया मे आ गया अब तो कोई भी पीछे हटने को तैयार नही था साख की बात थी ।  यह कोई सिर्फ श्याम मानव की ही बात नही थी अब अंधविश्वास के बैनर के पीछे खडे लोग-बाग की भी बात थी जो इसको आगे कर अपना निजी हित साध रहे थे । सिर्फ छोटे मोटे बैगा गुनिया और छोटे मोटे तांत्रिक इनके निशाने मे रहते थे ।  इससे दो फायदे थे जहा धर्म के आड मे हो रहे गलत काम को धर्म का हिस्सा बनाने मे यह लोग मानसिक रूप से क़ामयाब हो जाते थे जिससे सामने वाले पर अपने मूल धर्म के लिए थोडी आस्था कम हो जाती थी जिसका फायदा हो जाता था ।  इसका यही काम था अगर यह लोग निष्पक्ष रहते तो सभी जगह इस तरह की कार्रवाई को अंजाम देते पर ऐसा नही किया गया ।  इन्हे इन काम के लिए कौन लोग आर्थिक मदद करते थे यह भी अभी तक सामान्य लोगो को नही मालूम है ।  पर अप्रत्यक्ष फायदा हो रहा था ।  दुर्भाग्य से दांव उल्टा पड गया सामने वाले ने भी चुनौती स्वीकार कर ली ।  वैसे भी राजनीतिक फिजां बदली हुई है । सनातन धर्म वाले अब खुलकर सामने आ रहे है राजनीतिक फिल्मी सबको निपटाने के ही मूड मे है ।  विगत सत्तर साल से हाशिए मे रखने का दर्द अब खुलकर सामने आ रहा है । चुनौती रायपुर मे भी निष्पादित की जा सकती है ।  यह तीस लाख कहा से आ गए।  अभी तो आपके सामने मीडिया जनसमुदाय है फिर परीक्षण करने के लिए और कौन सी जगह चाहिए है ?  कुछ नही जादूगर फिल्म का क्लाइमेक्स ही बदल गया चुनौती देने वाला ही विलयन बन गया ।  भांपने मे गल्ती हो गई जिसे छोटे मोटे तांत्रिक समझे थे वह सिद्द पुरुष निकला अब तो वह मीडिया भी नतमस्तक हो गई जो अपने को जागरूकता का केंद्र समझती है ।  श्याम मानव को अपने भूल का अहसास होना चाहिए और अपने को वापस लेना चाहिए। यह बात सत्य है की जब स्व. बाल गंगाधर तिलक जी जब संत गजानन महाराज से मिलने पहुंचे तो उन्होने उन्हे कहा था की आप को कुछ दिन बाद ही कारावास होगा जो हुआ । ऐसी भविष्य वाणियो से यह अटा पडा है ।  जब श्रीकृष्ण का जन्म ही भविष्य वाणी से हुआ था और कंस की मृत्यु की भविष्य वाणी थी ।  यह परंपरागत सिद्द है इस पर संदेह प्रमाण मांगना सिर्फ मानसिक दिवालियापन से कम नही है ।  अंधविश्वास पर सत्य पर आधारित भविष्य वाणी बीस बैठी । 
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ





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