राशिफल - अध्यात्म

गुप्त नवरात्रि में दूसरे दिन की जाती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें पूजा विधि और कथा

गुप्त नवरात्रि में दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना पुरे विधि विधान से की जाती है. मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण भी इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है। विद्यार्थियों के लिए और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा बहुत ही शुभ फलदायी होती है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि –

मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के समय पीले अथवा सफेद वस्त्र धारण करें.

मां को सफेद वस्तुएं अर्पित करें, जैसे- मिसरी, शक्कर या पंचामृत.

ज्ञान और वैराग्य का कोई भी मंत्र जपा जा सकता है.

मां ब्रह्मचारिणी के लिए “ॐ ऐं नमः” का जाप करें.

जलीय आहार और फलाहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए.

जानिए कथा

पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया. एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया।

Read Also – माघ गुप्त नवरात्रि कब से होगी शुरू, जानिए किस दिन होगी मां के किस रूप की पूजा

कहते हैं कि कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे. तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं. इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए. कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं. पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया.

Read Also – गुप्त नवरात्रि में होती हैं इन महाविधाओं की उपासना, बहुत है महत्व

मान्यता है कि कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया. देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की. यह आप से ही संभव थी. आपकी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ. जल्द ही आपके पिता आपको लेने आ रहे हैं. मां की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है।

Related Articles

Back to top button