CGNews- रहस्यमयी धाम, साल में एक बार चैत्र नवरात्र के पहले रविवार होती है पूजा, महिलाएं नहीं खा सकती यहां का प्रसाद, प्रवेश भी वर्जित

गरियाबंद – छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में रहस्मयी निरई माता का एक ऐसा मंदिर है जो सिर्फ साल में एक बार चैत्र नवरात्र के पहले रविवार को ही खुलता है. सिर्फ पुरुष ही पूजा करते है. इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है. बाकी दिनों में यहां आना प्रतिबंधित होता है. निरई माता मोहेरा गांव से कुछ दूर पहाड़ी पर गुफा में विराजित हैं. साल में एक बार ही माता का दर्शन होता है, इसलिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं.
निरई माता का मंदिर कई रहस्य समेटे हुए है. वैसे तो छत्तीसगढ़ में कई ऐसे मंदिर हैं, जो लोगों को चकित करते हैं. उनमें से एक गरियाबंद जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित निरई माता का मंदिर है.
200 साल पुराने भक्ति के आस्था का केंद्र दो पहाड़ों के बीच स्थित निरई माता धाम में न मूर्ति है और न ही कोई मंदिर, फिर भी हजारों श्रद्धालु यहां अपनी मन्नत लेकर आते है. माता को गुलाल बंदन नहीं बल्कि सिर्फ नीबू, नारियल ही भेंट करते है. कई सालों तक मंदिर साल में सिर्फ 5 घंटे के लिए ही खुलता था पर बढ़ते जन सैलाब को देखते अब सुबह 7 बजे से 3-4 बजे तक माता का दर्शन किया जाता सकता है. आमतौर पर मंदिरों में जहां दिनभर देवी-देवताओं की पूजा होती है तो वहीं निरई माता के मंदिर में चैत्र नवरात्रि में केवल एक विशेष दिन ही सुबह 4 बजे से 9 बजे तक पूजा होता है.
निरई माता की ऊंची पहाड़ी नवरात्र के एक सप्ताह पूर्व प्रकाश पुंज ज्योति के समान चमकता है और चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार को जात्रा मनाया जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि यहां अपने आप ज्योत प्रज्ज्वलित होती है. यह निरई देवी का ही चमत्कार है कि बिना तेल के ज्योत 9 दिनों तक जलती रहती है. निरई माता मंदिर में महिलाओं को प्रवेश और पूजा-पाठ की इजाजत नहीं है. यहां सिर्फ पुरुष ही पूजा-पाठ की रीतियों को निभाते हैं.
महिलाओं के लिए इस मंदिर का प्रसाद खाना भी वर्जित है. कहते हैं कि महिलाएं अगर मंदिर का प्रसाद खा लें तो उनके साथ कुछ न कुछ अनहोनी हो जाती है



