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क्या आप जानते हो महाभारत में 18 अंक का क्या महत्व है, जाने यहां

महाभारत में 18 अंक का क्या महत्व है। महात्मा विदुर की कौन सी नीति है जिसे हर मनुष्य को अपनाना चाहिए। किन 10 मौकों पर गुस्सा करने से बचना चाहिए। क्या आप जानते हैं गरुड पुराण के अनुसार कितने प्रकार के नरक होते हैं आइये इन पर चर्चा करते हैं…

महाभारत

महाभारत हिन्दुओं का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है, जो स्मृति के इतिहास वर्ग में आता है। इसकी रचना ऋषि वेदव्यास ने की है। ऋषि वेदव्यास ने 18 पुराणों की रचना भी की है। यह महाकाव्य ‘जय संहिता’, ‘भारत’ और ‘महभारत’ इन तीन नामों से जाना जाता हैं। यह काव्यग्रंथ भारत का अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ हैं। इस ग्रंथ में 18 अंक का विशेष महत्व है।

महात्मा विदुर

महाभारत’ की कथा में महात्मा विदुर का पात्र बेहद ही महत्वपूर्ण है। विदुर (Vidur) कौरव-वंश की गाथा में अपना विशेष स्थान रखते हैं। विदुर नीति जीवन-प्रेम, जीवन-व्यवहार के रूप में अपना विशेष स्थान रखती हैं। सत्य-असत्य तथा सही-गलत का स्पष्ट निर्देश और विवेचन की दृष्टि से विदुर-नीति का विशेष महत्त्व है। व्यक्ति अपनी अपेक्षाओं से जुड़कर अनेक बार अपना हित ही देखता है। महात्मा विदुर की इन बातों को रखें सदा याद, जीवन में कभी नहीं होंगे असफल।

मानव जीवन में हर पल कुछ न कुछ घटनाएं घटती रहती हैं। इसके चलते मनुष्य की मानसिक स्थिति भी प्रभावित होती है। कुछ घटनाएं ऎसी होती हैं जो बेहद सुकून देती हैं, कई बार हम विचलित हो जाते हैं और कुछ मौकों पर हमें बेहद गुस्सा (क्रोध) आता है।

यहां हम मनुष्य के सबसे बड़े मानसिक विकार क्रोध (गुस्से) पर चर्चा करेंगे। जैसा कि सभी को पता है कि गुस्सा करने से ज्यादातर नुकसान होता है। हिंदू धर्मशास्त्रों में ऋषि, मुनियों, संतों ने क्रोध को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु कहा है। क्रोध या गुस्सा करने से अर्जित पुण्य का क्षय होता है। आज यहां उन 10 मौकों पर बात करेंगे जब मनुष्य को भूलकर भी क्रोध या गुस्सा नहीं करना चाहिए।

गरुड महापुराण

मृत्यु को लेकर हर प्राणी में भय रहता है। पाप कर्म में लिप्त रहने वाले दुष्टों का मृत्यु के बाद क्या होता है? इन्हें क्या सजा भोगनी होती है, किन-किन नरकों से होकर गुजरना पड़ता है? इस तरह जिज्ञासाएं अक्सर उठती हैं। मृत्यु से जुड़े प्रश्नों का समाधान गरुड महापुराण में मिलता है।

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