क्रमशः – विदेश यात्रा का संस्मरण 3 – आखिर वो दिन आ ही गया जब छोड़ना पड़ा घर
संस्मरण तीन अब पासपोर्ट हाथ मे आ गया अब ऐसा लगने लगा कि हम कुछ जाने की तरफ आगे बढ रहे है । पहले तो यह तय करने लगे कि कहा जाना है । पर यह सब हम लोगों ने बेटे और बहू पर ही छोड़ दिया था । फिर उन लोगों ने ही तय किया कि हम लोग फ्रांस इटली स्विट्जरलैंड व रोम होकर आएंगे करीब दो हफ्ते का प्रोग्राम था । अब हम लोगों ने वीसा के लिए आवेदन किया । कुछ दिनों बाद ही हमे वीसा के लिए मुंबई के लिए जाना था । पर अब हमे वह सब जो उसके पहले की तैयारियों में वयस्त हो गये । मै आप सब लोगों को इसलिए यह बता रहा हू कि जिससे कभी गये तो एक मोटा मोटी तैयारियों का आइडिया हो जाएगी । फिर वही बैंक एकाउंट मे भी कम से कम पचास हजार का बैलेंस रहना चाहिए । इतनी छोटी छोटी औपचारिकता की तैयारियों में काफी समय निकल जाता है । पहले हम पूना गये वीसा के लिए जितने डाकयूमेंट मांगे गए सबकी अलग-अलग फाइल बना कर रख दिये । हमे वीसा आफिस के लिए मुंबई के बांद्रा जाना था । बिल्कुल सही समय पर पहुंच गए पर पार्किंग नहीं मिली एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर कार पार्किंग मिली । लंबी लाइन लग चुकी थी उस कांपलेकस मे और अन्य आफिस के कारण काफी भीड़ थी । वीसा आफिस मे अपनी फाइल दिखाने के बाद प्रवेश मिला । बहुत बडा हाल और सभी देशों के वीसा आफिस के चैंबर और वीसा लेने वाले लोगों के बैठने की व्यवस्था व प्रसाधन अच्छा था । वैसे कुछ समय ही बाद हम लोगों का भी नंबर आ गया । पहले सौरभ गया वैसे उसे बाहर जाते रहने के कारण उसे अनुभव अच्छा था । हम चारो एक साथ जा रहे है यह बात उसने पहले ही बता दी थी तो बस हम लोगों का सिर्फ वेरिफिकेसन ही हुआ । सभी औपचारिकता को करते करते शायद तीन घंटे लग गये । हमारा काम हो गया तो हम लोग मुंबई में समुद्र मे बने पुल सीलिंक को देखने चले गए । सीलिंक देखकर ताज्जुब होगा कि कैसे बनाया गया होगा । गुजरने से समुद्र के बीच से निकलने से एक अलग सा आनंद आता है । फिर हम लोगो को यूरोप के अनुसार तैयारी के नाम से मुंबई में डेकथलान गये वहां पर वह शूज व जैकेट लिये जिससे वहां जाने के बाद हमे वहां तकलीफ न हो । एक बार ऐसी जगह जाने के बाद कोई भी व सब ले लेता है जिसकी आवश्यकता भी नहीं रहतीं। फिर लौटते मे हम लोग कुछ समय के लिए एक्सप्रेस वे से थोड़ा हटकर हम लोनावाला खंडाला के लिए घुस गये । प्राकृतिक सौंदर्य से भरी यह जगह के बारे मे कभी और लिखूंगा। बस हम लोगों ने यहां की चिकी लोणावला की चिकी जो बहुत प्रसिद्ध है वह लिये वहीं यहां का वडा पाव और मुंग बड़ा भी काफी प्रसिद्ध और टेस्टी रहता है । वहीं वहां का चाकलेट फज भी बहुत फेमस है । बस फिर क्या था रात तक वापस पूना आ गये । फिर कुछ दिनों मे ही हमारा वीसा भी आ गया । आगे फिर जाने की तैयारियों के बारे मे बात करूंगा ।
बस इतना ही
डा .चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




