राजनांदगांव जिले के छुरिया विकास खंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत नांगरकोहरा में स्वास्थ्य विभाग की बडी़ लापरवाही आई सामने आई है। नांगर कोहरा गांव की एक बड़ी आबादी पिछले कुछ दिनों से उल्टी-दस्त से ग्रसित हो गई है, लेकिन गांव में ना स्वास्थ्य कैंप लगाया गया ना ग्रामीणों की चिंता की गई। नतीजा यह रहा कि एक गांव की एक 6 वर्षीय बच्ची की मौत भी हो गई, जिसके बाद आनन-फानन में बीते शुक्रवार को यहां स्वास्थ्य अमले की टीम पहुंची है। ग्राम नांगरकोहरा में दो से तीन दिन में गांव के लगभग 80 प्रतिशत लोग उल्टी दस्त से ग्रसित हो गए है।
गांव के मुखिया ने अपने नजदीकी उपस्वास्थ्य केंद्र में एक दिन पहले जानकारी दे दी थी, पर कोई नहीं पहुंचा। जैसे ही 6 वर्ष की एक बच्ची कि मौत हुई तो दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। हालांकि बच्ची की मृत्यु किस वजह से हुई यह स्पस्ट नही हो पाया। इसके बाद पंचायत भवन में लोगों को की जांच के लिए अब कैम्प लगाया गया है। गांव में कोटवार के माध्यम से मुनादी कराई गई है। वहीं लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंचे डॉक्टर का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर यह दूषित पेयजल की वजह से होना दिखाई दे रहा है
कोरोना जैसी महामारी के बीच इस गांव के लगभग सभी लोगों का उल्टी दस्त से पीड़ित होने के बाद भी स्वास्थ विभाग की इस तरह लापरवाही गंभीर समस्या को जन्म दे सकती है। वहीं इस गांव में कुछ लोगों को सर्दी खांसी जैसे लक्षण भी नजर आ रहे हैं। इस गांव में 1000 की आबादी है जिसमें से लगभग 700 लोगों में उल्टी दस्त सर्दी खांसी और बुखार के लक्षण हैं। इसके बावजूद इस गांव में अब तक किसी का कोरोनावायरस जांच नहीं कराया गया है। वहीं इन लोगों के इलाज में भी महज खानापूर्ति ही नजर आ रही है।



