आज से पारसी नववर्ष ‘नवरोज’शुरु, जानें इससे जुड़ी बातें…
नवरोज से जुड़ी लोक कथा
नवरोज से जुड़ी पारसी समुदाय की बेहद प्रचलित लोक कथा है। इसके मुताबिक ऐसा कहा जाता है कि इस दिन शहंशाह जमशेद ने पारस (आज का ईरान) की जनता को संभावित प्राकृतिक आपदा से बचाया था। उन्होंने आज ही के दिन पारसी कैलेंडर की शुरुआत की थी। तब से पारसी समुदाय इस दिन को नवरोज के रूप में मनाते आ रहे हैं।
ऐसा होता है पारसी कैलेंडर
पारसी कैलेंडर में एक साल 360 दिन का होता है और बाकी बचें 5 दिन गाथा के रूप में अपने पूर्वजों को याद करने के लिए रखा जाता है। साल के खत्म होने के ठीक 5 दिन पहले इसे मनाया जाता है।
आज पारसी समुदाय के लोग दुनियाभर में अपना नववर्ष पूरे हर्षोल्लास के साथ मना रहे हैं। पारसी समुदाय के नववर्ष को नवरोज कहा जाता है। इसे पतेती और जमशेदी नवरोज के नाम से भी जाना जाता है। भारत में पारसी समुदाय के लोग अपने नए साल को शहंशाही पंचांग के मुताबिक मनाते हैं। महाराष्ट्र और गुजरात में पारसी समुदाय के लोग रहते हैं। इसलिए यहां नवरोज त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है।
कैसे मनाया जाता है नवरोज
नवरोज पर्व को पारसी समुदाय बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन घर की साफ-सफाई की जाती है। पारसी लोग नए कपड़े पहनकर फायर टेंपल जाते हैं और प्रार्थना के बाद एक-दूसरे को नवरोज की बधाईयां देते हैं। इस दिन कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। इस दिन पारसी समुदाय के लोग पारसी नववर्ष के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं। अपने घरों को सजाते हैं। घर में तरह-तरह की रंगोलियां बनायी जाती है। लोग अपने रिश्तेदारों को भेंट में उपहार देकर इस पर्व को सेलीब्रेट करते हैं।
नवरोज से जुड़ी मान्यताएं
पारसी लोग अग्नि की पूजा करते हैं। इस दिन पारसी लोग पूजा स्थल (फायर टेंपल) पर जाकर प्रार्थना करते हैं। इस दिन पारसी लोग अपने बुरे कर्मों को त्यागने का संकल्प लेते हैं और अग्नि देव से प्रार्थना करते हैं कि उनका नववर्ष उनके जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आए।




