
गिरीश गुप्ता गरियाबंद दर्रीपारा से खरता धमतरी मुख्य मार्ग को जोडने वाला सडक की स्थिति बेहद खराब हो गई है, बडे बडे गढढे जानलेवा सडक दम तोड रही है, तो वही बीते रात पहाडी क्षेत्रो में हुए बारिश के कारण इस मार्ग में आमदी और जैतपुरी के बीच सती नदी में निर्माण किये गये पुल बीच से टुटकर बह गया, इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आना जाना कर रहे है, इस मार्ग से जंहा एक ओर बडी संख्या में ग्रामीणों का आवगमन होता है वही हाईस्कूल के बच्चे भी आना जाना करते है, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती लोकेश्वरी नेताम, जनपद सदस्य खिलेश्वरी आयाम सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग जिला अध्यक्ष नरेन्द्र ध्रुव ने बताया कि पहाडी जंगल ईलाके में रात में भारी बारिश होने के कारण इस नदी के उपर से पानी बहने से पुल टुट गया, और ग्रामीणों को आने जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड रहा है जिसकी जानकारी संबधित विभाग के अधिकारियाें को देने के बावजूद भी अब तक कोई निरीक्षण में नही पहुचे है, जिला पंचायत सभापति लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि जल्द ही इस टुटे पुल का मरम्मत किया जाए, नही तो कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना घट सकती है इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा ।बारिश में क्षतिग्रस्त हुआ रपटा अब ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है।जिला मुख्यालय के अंतर्गत आमदी व जैतपुरी के मध्य का सती नाला पर बना रपटा बुरी हालत में पहुंच गया है। ग्रामीणों की हालत यह है कि वह जान जोखिम में डालकर रपटा पार कर रहे हैं, जबकि दर्रीपारा क्षेत्र के लगभग 15 गांवों के ग्रामीणों की आवाजाही यहां से होती है।
गरियाबंद विकासखंड के अंतर्गत आमदी व जैतपुरी के मध्य सती नाला में बना रपटा टूट गया है। यात्रा करने वाले दुपहिया व चार पहिया वाहन वालों को अपनी जान हथेली पर रखकर गुजरना पड़ता है यहां से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन पार होते हैं ।आसपास के ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इसे पार करने में मजबूर है । परेशानी रात्रि में ज्यादा होती है क्योंकि उस समय तो दूर से यह दिखाई भी नही देता।लिहाजा पूर्व में भी कई दुर्घटना हो चुकी है।यही रपटा 2010 में भी टूट गया था।उसके बाद इसे रिपेयरिंग किया गया था।और बीच बीच मे कई बार रिपेरिंग किया गया।लेकिन विभाग द्वारा ध्यान नही देने से ठेकेदार अपनी मनमानी कर बना देता है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। इसी सड़क मार्ग जोबा से खरता लगभग 16 किलोमीटर पर जगह जगह गड्ढे हो गया है।वही चार पांच दिन पहले कही कही गड्ढे पर रिपेरिंग के नाम से बजरी गिट्टी को डाल दिया गया था,डामर का नामोनिशान नही था,वह भी बरसात में धूल गया है।




