आज करेंगे बात तिरंगे पर, सबसे पहला झंडा कब और किसने फहराया जानते हैं आप?

आज डा.वाघ की वाल पर हम ” तिरंगा ” पर ही बात करेंगे । देश स्वाधीनता का अमृत महोत्सव मना रहा है । फिर इस पर देश की आन बान शान को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने घर घर तिरंगा से जोड दिया है । इसके कारण लोगो मे बहुत उत्साह है । जब हम इसकी सफलता को काश्मीर मे देख रहे है तो लोग कैसे इस अभियान से अपने को जोड रहे है यह पता चलता है । पर हमे तिरंगे के बारे मे व इतिहास के बारे मे कुछ जानकारी तो रखनी चाहिए। सबसे पहले तो सन 1904 मे बंगाल बटवारे के समय सिस्टर निवेदिता व महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. शुचिंनद्र बोस ने पहला झंडा फहराया जिसे आगे चलकर निवेदिता ध्वज के नाम से जाना गया । फिर इसके बाद एनी बेसेंट और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने हरा पीला लाल रंग का ध्वज बनवाया था । फिर सन 1921 मे कांग्रेस अधिवेशन के लिए स्व.पिंगली वेंकैया जी को महात्मा गांधी जी ने झंडा बनाने को कहा। वेंकैया जी ने सिर्फ हरा केसरी रंग का झंडा बनाया । फिर इसमे महात्मा गांधी जी ने सफेद रंग जुडवाया। फिर बाद मे चरखा भी बीच मे रखा गया । बाद मे चलाकर यह झंडा कांग्रेस का झंडा बनकर रह गया । आगे चलकर फिर देश के लिए झंडे की आवश्यकता थी तो संविधान सभा के प्रशासनिक आईसीएस अधिकारी सैय्यद बदरूददीन तैयब जी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। जिसे उन्होने गांधी जी के दिशानिर्देश पर भारत के प्रथम राष्ट्रपति स्व.डा राजेंद्र प्रसाद जी के साथ इस जिम्मेदारी को निभाया । पर इसके अंतिम रूप मे स्व.सैय्यद जी की पत्नी जो एक बहुत अच्छी डिजाइनर भी थी स्व.श्रीमती सुरैया सैय्यद का भी महत्वपूर्ण रोल था । कमोबेश वही झंडा अंतिम रूप ले रहा था पर कांग्रेस का भी वही झंडा होने के कारण चरखा की जगह अशोक चक्र को अपनाकर संविधान सभा की मंजूरी ली गई। जो यह राष्ट्रीय ध्वज के रूप मे स्वीकार हुआ । आगे चलकर उधोगपती कांग्रेस के पूर्व सांसद श्री नवीन जिंदल ने न्यायालय की लंबी लड़ाई कर आम नागरिक को भी तिरंगा झंडा के सम्मान का अधिकार दिलाया । वही जब भी झंडा आम नागरिक रखे तो हमे दाहिने हाथ मे रखने चाहिए। वही हमे इस बात का ध्यान रखना चाहिए की झंडा जमीन पर नही लगना चाहिए । वही झंडा राष्ट्रीय शोक के समय ही झुकता है । उपर का केशरी रंग शौर्य का प्रतीक है । बीच का सफेद रंग शांति का प्रतीक है । वही हरा रंग हरियाली का प्रतीक है । बीच मे अशोक चक्र भी लिया गया है ।जहा तीन रंग को बराबर अनुपात मे लिया गया है । वही इसे दो अनुपात तीन मे लिया गया है । वही अमृत महोत्सव मे पचहत्तर साल मे तेरह अगस्त से लेकर पंद्रह अगस्त तक पहले बार रात को भी झंडा फहरेगा । निश्चित प्रधानमंत्री की यह पहल आम नागरिक को तिरंगा से जुड़ेगा ।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ





