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Rahul Gandhi Defamation Case: राहुल गांधी को कर्नाटक HC से बड़ी राहत, ‘करप्शन रेट कार्ड’ मानहानि मामले में याचिका रद्द


राहुल गांधी

Rahul Gandhi Defamation Case:  कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को मंगलवार को एक बड़े कानूनी मामले में बड़ी राहत मिली है. कर्नाटक हाई कोर्ट ने साल 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि के मामले को रद्द कर दिया है. यह मामला ‘करप्शन रेट कार्ड’ नामक विवादास्पद विज्ञापन से जुड़ा था, जिसमें तत्कालीन भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे. केस रद्द होने के बाद राहुल गांधी की यह बड़ी कानूनी जीत मानी जा रही हैं.

हाई कोर्ट का फैसला

जस्टिस सुनील दत्त यादव की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में कार्यवाही जारी रखना ‘कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’ होगा.  यह भी पढ़े:  Rahul Gandhi Columbia University Speech: ‘इनोवेशन से जीतती हैं भारतीय कंपनियां, क्रोनीजम से नहीं’, राहुल गांधी ने कोलंबिया में की ऑटो कंपनियों की सराहना

अदालत ने राहुल गांधी की इस दलील को स्वीकार किया कि किसी सरकार के प्रशासन की आलोचना करना मानहानि के दायरे में नहीं आता. राहुल गांधी ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि विज्ञापन में किए गए दावे प्रशासनिक आलोचना थे और इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

क्या था ‘करप्शन रेट कार्ड’ मामला?

यह विवाद मई 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान शुरू हुआ था. कांग्रेस पार्टी ने प्रमुख समाचार पत्रों में ‘करप्शन रेट कार्ड’ शीर्षक से विज्ञापन प्रकाशित करवाए थे. इन विज्ञापनों में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन भाजपा सरकार ‘40% कमीशन’ वाली सरकार है और नियुक्तियों व तबादलों के लिए रेट तय किए गए हैं.

इस विज्ञापन के खिलाफ भाजपा की राज्य इकाई ने निजी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें राहुल गांधी, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को आरोपी बनाया गया था. भाजपा का दावा था कि ये आरोप पूरी तरह से झूठे, निराधार और पार्टी की छवि खराब करने वाले थे.

राहुल गांधी की दलीलें

सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के वकील ने कोर्ट को बताया कि:

  • राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से इन विज्ञापनों को जारी करने का निर्देश नहीं दिया था.

  • विज्ञापन में तत्कालीन सरकार की आलोचना की गई थी, न कि किसी विशिष्ट व्यक्ति की मानहानि.

  • शिकायतकर्ता (भाजपा) इस मामले में सीधे तौर पर ‘पीड़ित पक्ष’ नहीं है, क्योंकि आरोप सरकार पर थे.

    केस की सुनाई में कोर्ट में हाजिर भी हो चुके है राहुल

इससे पहले जून 2024 में राहुल गांधी इस मामले में बेंगलुरु की एक विशेष अदालत में पेश हुए थे, जहां उन्हें जमानत मिल गई थी. दिसंबर 2024 में उन्हें व्यक्तिगत पेशी से भी छूट दी गई थी. जनवरी 2025 में हाई कोर्ट ने इस मामले की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिसे अब पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है.

इस फैसले को कांग्रेस के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में था और इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही थी.




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