#Social

NCP MLAs Meeting: सुनेत्रा पवार कल ले सकती हैं बड़ा फैसला, एनसीपी-SP और राकांपा के विलय की अटकलों के बीच मुंबई में बुलाई विधायकों की बैठक


(Photo Credits Twitter)

NCP MLAs Meeting: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के विलय की चर्चाएं तेज हो गई हैं. उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार कल, मंगलवार को मुंबई में अपनी पार्टी के विधायकों के साथ एक बड़ी बैठक करने वाली हैं. माना जा रहा है कि इस बैठक का मुख्य एजेंडा शरद पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी (एसपी) गुट के साथ संभावित विलय पर विधायकों की राय जानना है. यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी के भीतर से ही सामूहिक चर्चा की मांग उठ रही है.

विधायकों की राय जानना है प्राथमिकता

वरिष्ठ नेता और विधायक दिलीप वलसे पाटिल ने पुष्टि की है कि उन्हें कल की बैठक का संदेश मिल चुका है. सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार विलय जैसे बड़े फैसले से पहले सभी विधायकों से वन-टू-वन (व्यक्तिगत) संवाद कर सकती हैं. दरअसल, पुसद से विधायक और राज्य मंत्री इंद्रनील नाइक सहित कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि नेतृत्व को किसी भी फैसले से पहले पार्टी के पदाधिकारियों और विधायकों को विश्वास में लेना चाहिए.

‘अजित दादा को सच्ची श्रद्धांजलि’

इगतपुरी से विधायक हीरामन खोसकर ने दावा किया है कि 40 में से लगभग 35 विधायक विलय के पक्ष में हैं. उन्होंने दिल्ली में पत्रकारों से कहा, “हम चाहते हैं कि दोनों गुट फिर से एक हों, और यही अजित दादा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.” गौरतलब है कि अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद से ही पार्टी के भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं.

शरद पवार गुट का रुख

दूसरी ओर, शरद पवार गुट (NCP SP) के नेताओं ने दावा किया है कि अजित पवार स्वयं स्थानीय निकाय चुनावों के बाद विलय के पक्ष में थे. हालांकि, एनसीपी (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने फिलहाल इस मुद्दे पर अधिक बोलने से परहेज किया है. उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर अभी इस पर कोई नई चर्चा नहीं हो रही है और नेताओं को सार्वजनिक टिप्पणी न करने की सलाह दी गई है.

छगन भुजबल का ‘कैप्टन’ पर भरोसा

वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल ने स्पष्ट किया है कि विलय पर कोई भी अंतिम निर्णय सुनेत्रा पवार ही लेंगी. उन्होंने उन्हें पार्टी का ‘कैप्टन’ बताते हुए कहा कि वर्तमान में प्राथमिकता उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनना है. भुजबल के अनुसार, अध्यक्ष पद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही विलय के तकनीकी और राजनीतिक पहलुओं पर विचार किया जाएगा.

फिलहाल, सभी की निगाहें कल होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं, जो महाराष्ट्र की सत्ता संरचना और आगामी चुनावों के लिहाज से काफी निर्णायक साबित हो सकती है.




Related Articles

Back to top button