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CM Siddaramaiah on MUDA Case: ‘चिंतित या तनावग्रस्त नहीं हूं’’, मैंने कुछ गलत नहीं किया है- CM सिद्धरमैया


CM Siddaramaiah | Credit- ANI

मैसुरु, 3 सितंबर : कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मंगलवार को कहा कि मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) स्थल आवंटन मामले में उनके खिलाफ अभियोजन के लिए राज्यपाल की मंजूरी के बाद वह ‘‘चिंतित या तनावग्रस्त नहीं हैं’’ क्योंकि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है. विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वे इस बात से चिंतित हैं कि उनके (मुख्यमंत्री के) खिलाफ ‘‘झूठ सच न हो जाए.’’ सिद्धरमैया ने यहां पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘विपक्ष ने झूठ बोला है और वे इसे सच साबित न होने को लेकर चिंतित हैं. मैंने कभी झूठ नहीं बोला और न ही कोई गलत काम किया है, इसलिए मैं चिंतित नहीं हूं.’’ उनसे पूछा गया था कि वह शांत दिख रहे हैं, जबकि विपक्ष दावा कर रहा है कि सिद्धरमैया तनावग्रस्त और चिंतित हैं.

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को एमयूडीए मामले में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर अंतरिम रोक नौ सितंबर तक बढ़ा दी. उच्च न्यायालय ने मामले में उनके खिलाफ अभियोजन के लिए राज्यपाल थावरचंद गहलोत की मंजूरी की वैधता को चुनौती देने वाली सिद्धरमैया की याचिका पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी. राज्यपाल ने 16 अगस्त को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के तहत प्रदीप कुमार एस पी, टी जे अब्राहम और स्नेहमयी कृष्णा की याचिकाओं में उल्लिखित आरोपों के संदर्भ में अभियोजन की खातिर मंजूरी प्रदान की. सिद्धरमैया ने 19 अगस्त को राज्यपाल के आदेश की वैधता को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया. यह भी पढ़ें : भाजपा, आरएसएस नेताओं को जाति जनगणना कराने के लिए बाध्य कर देंगे: लालू

वरिष्ठ कांग्रेस विधायक और प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष आर.वी. देशपांडे द्वारा रविवार को मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए? यह हाईकमान और विधायक तय करेंगे….’’ मुख्यमंत्री ने मंगलवार को चामुंडी पहाड़ी पर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर की यात्रा की और वहां देवी की पूजा-अर्चना की. उन्होंने चामुंडेश्वरी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के गठन के संबंध में विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियम के कार्यान्वयन पर लगी रोक को अदालत द्वारा हटाए जाने के बाद पहली बार प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता की.




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