BJP ने RSS से बढ़ती दूरी पर लगाया विराम

आरएसएस की तरफ से भाजपा के लिए पूरी ताकत से काम न करने का मुद्दा भी उभरा था, जिसका काफी नुकसान भाजपा को हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, चुनावों के बीच में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का आरएसएस को लेकर दिया बयान भी आरएसएस को रास नहीं आया था। इसके पहले टिकट वितरण और कई संगठनात्मक व राजनीतिक फैसलों में भी आरएसएस की राय को दरकिनार किया गया था।
BJP भाजपा के महासचिव संगठन बी एल संतोष भी मौजूद थे। इसके बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान भी चर्चा में रहा, जिसे परोक्ष रूप से भाजपा के लिए ही संदेश माना गया। सूत्रों का यह भी कहना है कि मोदी सरकार में आरएसएस के एजेंडे पर काफी काम हुआ है, लेकिन आरएसएस की राय और उसका सम्मान को लेकर दिक्कतें बढ़ी हैं। ऐसे में आरएसएस ने भी एक दूरी बनाई और भाजपा को चुनावों में नुकसान हुआ। अब भाजपा आरएसएस को साधने में जुटी है और इस आदेश को इसी दृष्टि से देखा जा रहा है। चूंकि इसका खुलासा भी गुरु पूर्णिमा के दिन हुआ है, जो आरएसएस में गुरु दक्षिणा के रूप में मनाया जाता है।




