देश विदेश

Ukraine Russia War – रक्षा समझौते के बावजूद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान रूस दौरे पर जाकर अपना समर्थन कर आए – cgtop36.com


डा. वाघ की वाल से आज अपनी बात पर यूक्रेन के मामले मे भारत की विदेश नीति पर चर्चा करेंगे । युद्ध को 13 दिन हो गए है पूरा यूक्रेन करीब करीब तबाह सा हो गया है । इस भीषण काल मे भी भारत ने अपने नागरिको जिसमे छात्र अधिक थे सफलतापूर्वक आपरेशन गंगा के तहत वापस ले आया है । यूक्रेन वह देश है जिसने हर समय पाकिस्तान का साथ दिया है । उनके बीच रक्षा समझौता भी है । इसके बाद भी इस युद्ध के समय पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान रूस दौरे पर जाकर अपना समर्थन कर आए है । हालाकि रूस को इसमे कोई विशेष दिलचस्पी नही थी ।  पर यूक्रेन वह देश है जिसने पाकिस्तान को हर मुद्दे पर समर्थन दिया था चाहे वह काश्मीर का मुद्दा रहा हो । वही पाक द्वारा प्रायोजित आतंकवाद मे भी यूक्रेन ने अपना पल्ला झाड़ा हुआ था । यूक्रेन वह देश जहां भारत के अधिकांश छात्र चिकित्सा महाविद्यालय मे प्रवेश लेते रहे है । इसके बाद भी सामान्य संबंध तक न बन पाना यह उसके भारत विरोधी रूख के कारण ही यह परिस्थितियां निर्मित हुई है । वही उसका यह भ्रम की इयू उसके साथ है नाटो के देश उसके साथ है तो वह रशिया से आसानी से मुकाबला कर लेगा ।  यूक्रेन के राष्ट्रपति श्री जेलेनसकी का यह भ्रम भी इस युद्ध का मूल कारण है । वही रूस इस समय आरपार के मूड मे ज्यादा था ।  उसे न नाटो पर न इयू पर तनिक भरा विश्वास नही था । इसलिए रूस ने जो शर्त यूक्रेन के सामने रखी न मानने पर हमले का उसका निर्णय के दोषी भी इयू के मेम्बरान भी है जिन्होने कभी रूस को आश्वस्त किया था पर अपने वचन मे कायम नही रह सके । अपने देश की रक्षा करना हमारा पहला कर्तव्य है यही काम राष्ट्रपति पुतिन कर रहे है।  वही हमारी विदेश नीति बिल्कुल देश के हितो के अनुरूप है ।
भले हम इन कुछ सालो मे थोड़ा-बहुत अमेरिका के नजदीक थे पर इसका तात्पर्य यह कतई नही की हम उसके हिसाब से चले । पहले हमे अपने देश को देखना है । जिस देश ने पचास साल से हमारा साथ दिया है वही मोदी जी के अनुरोध पर छै घंटे का युद्ध विराम पूरे विश्व को हैरान करने वाला निर्णय है । हमने अपने छात्रो को ऑपरेशन गंगा मे निकालने मे सफलता पाई है । निश्चित यह सरकार देश हित मे ही निर्णय लेगी । आज भी इयू व नाटो जब यूक्रेन के पीछे खडे थे तो उसका यह रौद्र रूप देखकर उन लोगो ने भी अपने हाथ खींच लिए है । यह वह लोग है जिन्होने इस देश के विगत तीस साल से चल रहे आतंकवाद पर खामोशी अखतियार कर कभी भी इस देश का साथ नही दिया । जब यह लोग विरोध नही कर रहे है तो भारत क्यो फटे मे पैर डाले । न इयू मे न नाटो मे नो फ्लाई जोन बनाने की हिम्मत नही है वही तो खुलकर युद्ध मे आना तो बहुत दूर की बात है । वैसे भी यूक्रेन को नाटो व इयू बनाने का सपना दिखाने वाले भी यही लोग है ।  यूक्रेन को इस मानसिक स्थिति मे लाने अदृश्य हाथ भी इनका है । दुर्भाग्य से रह दोनो देश इतना आगे बढ गए है की कोई भी वापस आने की स्थिति मे नही है । किसी की बात यह मानने से रहे फिर ऐसी कूटनीति कर भारत क्यो अपनी विदेश नीति खराब करे । फिर यह यूनो क्या अचार डालने के लिए बनाया गया है ? यह यूनो और उसके वीटो पावर वाले देश गलत बातो के लिए वीटो का उपयोग करते है तो यह यूनो भी अप्रासंगिक लगने लगता है । फिर यहां तो वीटो पावर वाला देश रूस ही है उसके खिलाफ कौन प्रस्ताव लाएगा लाएगा भी तो रूस तो वीटो कर देगा ।  यही कारण है यूनो इतने बडे मुश्किल मे असहाय सा लग रहा है । यूक्रेन के राष्ट्रपति को भी अंतिम उम्मीद भारत के प्रधानमंत्री पर ही लग रही है । मोदी जी है तो सब मुमकिन है । देखो आने वाले समय मे हमारे प्रधानमंत्री अपनी क्या भूमिका निभाते है । 
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ



Related Articles

Back to top button