Ukraine Crisis – पिछले दो तीन माह से यूक्रेन की हालत हो रही बद से बदत्तर – डॉ. वाघ – cgtop36.com

डा वाघ की वाल से आज अपनी बात पर यूक्रेन के हालात पर चर्चा की । पिछले दो तीन माह से यहां की हालत ब्द से बदत्तर होती जाती जा रही है । वही रशिया भी अपने जिद्द पर कायम है । अब तो ऐसा महसूस हो रहा है पुतिन ने भी अपने नाक का सवाल बना लिया है । पर इस तनाव का असर पूरी विश्व पर पडने वाला है फिर भारत इससे कैसे अछूता रह सकता है । वैसे भारत न तीन मे है न तेरह मे पर हम वेट एंड वाच नीति पर चल रहे है । वही हमारे यहां का विपक्ष तो रूस के चलते सबके मुंह मे दही जम गया है । वैसे न इनके विरोध से कोई फर्क नही पडने वाला है पर यह राजनीतिक औपचारिकता है की हर दल अपना राजनीतिक नजरिया देश के सामने रखता है । कल इसके कारण महंगाई बढती है तो यह लोग आलोचना की अपनी दुकान तुरंत खोल बैठेंगे । क्या हो सकता है यह हर सामान्य नागरिक को लगता है । यूक्रेन पर नाटो देश व अमेरिका खुलकर यूक्रेन के पक्ष मे है । वही यूक्रेन को भी यह देश नाटो का हिस्सा बनाने पर एकमत है । इससे यूक्रेन जहां ऐसा होने से पूरी तरह अपने को जहा सुरक्षित महसूस करेगा वही इन देशो को विशेषकर अमेरिकन को रशिया से लगी हुई सीमा तक पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा । जिससे राजनीतिक प्रभुत्व हर समय बना रहेगा यही चिंता रूस की भी है । वही हम कहां खडे है और कुछ होता है तो हमारी रणनीति क्या होनी चाहिए यह विदेश नीति हमारे लिए एक अग्नि परीक्षा से कम नही है । न हम रूस को नाराज कर सकते है न अमेरिकन व नाटो देशो को पर यह संतुलन भी ज्यादा दिन चलेगा ऐसा संभव नही है बस जितने दिन खींच लो बस यही है । हमारे साथ तो यह स्थिति है की न हम रूस का साथ छोड सकते है न अमेरिका का हमारा दोनो के साथ रक्षा संबंध है । पर यहां सबसे ज्यादा चीन बहुत फायदे की स्थिति मे है । उसका दोनो से संबंध खराब है वही युद्ध के हालात मे रह देश कमजोर भी होंगे यही चीन चाहता है । अगर अमेरिकन हारते है तो चीन की तो बल्ले बल्ले है । फिर वह तो ताइवान पर आक्रमण कर दे तो कोई बडी बात नही । वही अभी तक वह रूस से मजबूत होने के कारण दोस्ताना व्यवहार कर रहा था । कही रूस हारा तो चीन भारत मे जो हालात पैदा किए है उसे करने मे कोई संकोच भी नही करेगा । कुल मिलाकर दोनो हाथो मे लड्डू है । इसके बाद भी यह युद्ध की आशंका व विश्व युद्ध पर महंगाई चरम मे कही पहुचे तो कोई बडी बात नही । वही परमाणु संपन्न देशो की लडाई किस हद तक जाती है यह आने वाला कल बताएगा । पर नाटो व अमेरिका ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाकर एक कदम आगे तो बढे है । रूस इस आर्थिक मोर्चे बंदी का क्या जवाब देगा यह आने वाले समय मे पता चलेगा । पर यह बात सही है यूक्रेन पर आधिपत्य कर रूस अगर पुराने अपने स्वरूप मे आ रहा तो यह पुतिन सोवियत संघ के साथ विश्व के सबसे ताकतवर नेता के रूप मे अपने को स्थापित कर लेंगे । पर यही काम भारत मे मोदी करेंगे तो पाक बांग्लादेश के नेताओ की बात छोडो यहां के विपक्षी नेताओ को ही इन देशो की स्वतंत्रता की फिक्र लगने लगेगी । इनके मानवाधिकार की फिक्र की धर्मनिरपेक्षता की फिक्र इनको लगने लगेगी । देखो ऊंट किस ओर करवट लेता है यह आने वाले समय मे पता चलेगा । पर यह जरूर है इसकी तपिश मे देश के साथ हम भी झुलस जाए तो कोई आश्चर्य नही ।
बस इतना ही ।
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




