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जिस पार्टी ने मुस्लिम महिलाओं के समर्थन में काम किया उसके अब के नजरिए से आश्चर्य है – डॉ चंद्रकांत रामचंद्र वाघ

आज मै एक समाचार पढ कर स्तब्ध रह गया । जिस पार्टी ने मुस्लिम महिलाओं के लिए जहां पूरे विपक्ष के साथ उन मुस्लिम भाईयों के खिलाफ अपने उस राजनीतिक मकसद को पूरा करने के लिए इन महिलाओं के अधिकार दिलाने की जो प्रतिबद्धता दिखाई थी उसका हर मुस्लिम महिलाओं ने अब मुस्लिम समुदाय ने भी स्वीकारा और स्वागत भी किया। मै भारतीय जनता पार्टी की बात कर रहा हू। जिसके कारण महिलाओं को उनके अधिकार प्राप्त हुए। पर अब यह बात पुरानी हो गई ।पर अब मै तो इन सियासतदानों के नजरिए से हतप्रभ भी हू । कैसे ये अपनी राजनीतिक जिंदगी और वयक्तिगत जिंदगी से तालमेल नहीं बिठा पाते। ऐसा लगता है कि ऐसे लोग राजनीति के लिए परिपक्व नहीं हुए हैं। हर नेताओं की दो जिंदगी रहतीं है । अधिकांश लोग अपने राजनीतिक जीवन को पारिवारिक जीवन से दूर रखते है । यह उनका निजी मामला है। पर जब आप सार्वजनिक जीवन में आते है तो फिर आपका निजी जीवन भी नहीं रहता। इसलिए चाहे नेता हो क्रिकेट स्टार हो फिल्म स्टार हो लोगों को उनके वयक्ति गत जीवन मे क्या हो रहा है उसकी उत्सुकता बनी रहती हैं। मै अब मूल विषय पर आऊं अभी पश्चिम बंगाल के राजनीति में काफी उथल पुथल हो रहा है। गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के जाने के बाद तो इस्तीफे का तूफान सा आ गया है । यह राजनीति है सब चलते रहता है। पर तृणमूल कांग्रेस से भी एक सांसद सौमित्र खान भी ने भारतीय जनता पार्टी मे प्रवेश कर लिया है। पर इस इस्तीफे और भाजपा के प्रवेश ने एक छोटी सी राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है । सौमित्र खान के इस कदम से उनकी पत्नी जो बीजेपी मे थी उसने इस्तीफा देकर तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा वयक्त की है । सुजाता मंडल खान भारतीय जनता युवा मोर्चा की नेता थी । जब सौमित्र खान ने भारतीय जनता पार्टी मे शामिल हुए तो जो भी राजनीतिक हालात हो पर सुजाता मंडल खान ने भारतीय जनता पार्टी पर महिलाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है इसका आरोप लगाकर इस्तीफा देकर तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर लिया। दुर्भाग्य से पारिवारिक मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया। पर बात यहां तक भी होती तो कोई बात नहीं पर सौमित्र खान ने तलाक कहकर कानूनी नोटिस देकर उस भाजपा के लिए एक राजनीतिक सोचने का विषय बना दिया है कि यह दल महिलाओं के आत्म सम्मान के लिए यहां तक गये और आज कल का आया उनके ही नेता का यह आचरण बिलकुल ठीक नहीं है। अभी तक यहां के लोकतंत्र में परिवार के सदस्यों का अलग अलग दलों से संबंध आम बात है। अब तो लोगों ने इसे भी व्यवसायिक आचरण मे लाकर राजनीति का वयवसायी करण कर फायदे उठाने मे कहीं भी कोई कंजूसी नहीं बरती । चलो विषय पर स्व. आचार्य जे . बी . कृपलानी उस समय सोशलिस्ट विचारधारा के नेता थे और उनकी पत्नी कांग्रेस विचारधारा की स्व. श्री मति सुचिता कृपलानी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी रही । पर राजनीतिक छाया उनके जीवन में कभी भी पारिवारिक मूल्यों पर नहीं पडी । खैर यह विषय सौमित्र खान का अत्यंत निजी मामला है। उन्हे पूरा कानूनी हक भी है । पर यह भी उतना ही सच है कि यह पार्टी लाइन के विपरीत है। वहीं राजनीति के मूल्यो के खिलाफ भी है । बस इतना ही
डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

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