विशेष लेख – बड़े राजनीतिज्ञों की तुच्छ बातें शोभा नहीं देती, भारत ऐसे रत्नो से भरा पड़ा है

चलो आज इस लोकतंत्र के उन महानायकों के टिप्पणियों पर चर्चा करे जो हमारे लोकतांत्रिक वयवस्था के चलते उस पद पर पहुंचने मे सफल हो जाते है जहां कोई न योग्यता लगती है सिर्फ आपके राजनीतिक कौशल या जुगाड़ का खेल रहता है। ऐसे महानुभावों की जब अवांछित वयक्तवय आते है तो एक आम नागरिक इनके इस टिप्पणी पर सिर्फ इनके मानसिक दिवालियापन पर ही अफसोस से ज्यादा कुछ नहीं कर पाता । पर दुर्भाग्य से इन्ही लोगों के साये मे आगे की राजनीति को देखने को बाध्य भी होता है। चलो इन दिवालिया टिप्पणी के खजाने पर आज चर्चा की जाए । चलो आज की सबसे खबरों मे रहने वाली वो टिप्पणी जिस पर करीब करीब सभी चैनलों ने इस पर बहस कर डाली। एक बडे प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री और विदेश आस्ट्रेलिया से शिक्षित युवा जब अपने राजनीतिक स्वारथ के लिए जब कोरोना के वैक्सीन पर किसी दल के लिए कटाक्ष करे तो यह समझ मे आ जाता है पर यह कहे कि यह वैक्सीन बीजेपी का है मै नहीं लगाऊंगा कि इन लोग अपने राजनीतिक फायदा नुकसान के लिए किसी हद तक भी जा सकते हैं। इन्हे इस बात से कोई लेना देना नही रहता है कि इसका असर देश पर और उन नागरिकों पर क्या पडेगा जो इनके समर्थक रहते हैं। इसी के साथ उन एक विपक्ष का दल जिसकी भी कई राज्यों में सरकार है और वहां की सरकार भी अपने यहां कोविड वैक्सीन की पूरी तैयारी कर रही है वहीं उनके कई राष्ट्रीय नेता जब वैकसीन पर प्रश्न चिन्ह खडा करते है तो इनके दोहरेपन के चरित्र का उजागर होता है । वहीं इस देश के पूर्व रक्षा मंत्री और एक प्रदेश के तीन बार रहे पूर्व मुख्यमंत्री की वो टिप्पणी जो अपराधीयो और बलात्कारियों की हौसला अफजाई करतें है कि बलातकार के संदर्भ मे उनकी यह टिप्पणी की बच्चो से गलती हो जाया करती है। कुछ नहीं इसका सीधा मतलब है कि अपने उन समर्थकों के लिए बचाने का एक रास्ता निकालने की कोशिश है । अब उस टिप्पणी पर आऊं जो इस देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे है । वह प्रधानमंत्री जो देश बटवारे के दंश का असर जानता हो वह पूर्व प्रधानमंत्री जिसे निर्वासित होना पड़ा और यहां शरण लेनी पड़ी। उसे उस समय पाकिस्तान मे हिंदूओ के उपर हुए अत्याचार को जिसने देखा भी है उसके बाद जब यह बंदे अपने राजनीतिक हितों के लिए स्वारथ के लिए जब यह बोले कि इस देश के संसाधनों पर मुसलिमो का पहला हक है तो इनकी विद्वानता पर ही शक होने लगता है। फिर देश के सबसे बडे संवैधानिक पद पर बैठा वयक्ति यहां के बहुसंख्यक समुदाय हिंदूओ को दोयम दर्जा का नागरिक रखना चाहते हैं तो यह बात मन मे कुंद करने लगती है कि इन लोग अपनी राजनीति के लिए किस हद तक नीचे जाऐंगे। फिर यह कैसे प्रधानमंत्री तक पहुंचे यह अलग विषय है। चलो इस देश की राजनीति का दिशा तय करने वाले एक पूर्व उप प्रधानमंत्री की बात की जाए। इस राजनेता ने भी देश विभाजन का दंश सहा है । इस नेता ने भी अपने समुदाय को विस्थापित होते देखा है और जो आज तक अभी भी जारी है । किसी समय यह अपने दल का सर्वे सर्वा था । यही वो शख्स था जिसने राममंदिर के लिए पूरे देश में अलख जगाई। कुछ हद तक राममंदिर के निर्माण मे आज इस मुकाम तक पहुंचाने वाला भी यही शख्स रहा है । इसके लिए निष्ठा के कारण बहुत नेताओ ने अपने दल मे मुखर रहकर कई लोगों ने जहां किनारा तक कर लिया और कुछ लोगों की राजनीति भी खतम हो गई । पर महान बनने के चक्कर मे सेकयूलर बनने के फिराक मे इस बंदे ने भी वह कर दिया जिसकी अपेक्षा तक नहीं थी । पाकिस्तान दौरे मे देश विभाजन के महानायक कायदे आजम जिन्ना को अपनी श्रद्धांजलि दी । शायद उस दिन ही इनके राजनीति की भी श्रद्धांजलि हो गई । भारत का लोकतंत्र ऐसे नवरत्नो से भरा पडा है। कभी कोई एक ही सामान का पांच बार अलग-अलग कीमत बताता है। मै ज्यादा नहीं जाता आप सब लोगों को मालूम है। फिर कभी इस पर आऊंगा। बस इतना ही
डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ



