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विशेष लेख – कानून सबके लिए समान पर वाकई है, यक्ष सवाल

डा. वाघ की वाल से आज अपनी बात मे हम बचपन से सुन रहे है पढ रहे है कि कानून सबके लिए समान है ।  पर यह क्या सच है अब संशय होने लगता है । वैसे लोगो को यह महसूस होता रहा है कि लोगो की पहुंच व पैसा निश्चित न्याय मे उनकी जहां मदद करता है । वैसे भी आपका रूतबा आपका पैसा आम लोगो से ज्यादा न्याय दिलाने मे सहायक होता है ।  फिर कानून की छोटी छोटी पेचदगीया इनके लिए कवच का काम करती है ।  बडा वकील मतलब अपने मुवक्किल को कानूनन फंसे व्यक्ति को जबडे से बाहर निकाले ।  बडा वकील मतलब उसका हर मुवक्किल निर्दोष व पाक साफ । बड़ा वकील मतलब उसकी सुविधा की हिसाब से तारीख निर्धारित होना ।  भले हम आज इस सिस्टम का हिस्सा है पर एक आम नागरिक को अब व्यवस्था से दुख के साथ एक  आक्रोश भी है । वह यह समझ ही नही पाता कि विशेष लोगो के लिए इतनी सुविधा कैसे उपलब्ध हो जाती है । एक कलाकार के लिए कही जमानत की अपील कही खारिज हो जाये तो उसके ऊपर की अदालत पर व्यवस्था बस इन्ही लोगो के बस की बात है ।  जब अदालत कुछ लोगो के लिए रविवार को खुलने लगे तो एक आदमी सोचने को मजबूर हो जाता है ।  कोई आपात स्थिति है तो बात समझ मे भी आती है । पर यह तो एक सामान्य सा मामला है जिसमे आपात स्थिति बना दी गई। अगर आप धनाढय है तो कोई भी गलत का काम नही कर सकते । पर दुख इस बात का है कि सत्य बोला जाए लिखा जाए तो कोर्ट की अवमानना मान लिया जाता है ।  यह एक आम आदमी का संवैधानिक नागरिक अधिकार है कि वह भी कोर्ट से पूछे कि ऐसे किसी  केस को ऐसा कौन सा संवेदनशील मामला बना दिया जाता है ।  वैसे भी आतंकवादियो को लिए रात को जिस तरह से कोर्ट ने सुनवाई की यह भी बात आम लोगो को रास नही आई ।  वैसे भी तथाकथित बडे वकीलो ने इस तरह से कोर्ट खुलवाना अपना संवैधानिक अधिकार ही बना लिया है । जिसका उपयोग कानून के उस लूप पोल का हिस्सा बनाकर अपने फायदे के लिए कर लेते है । यही कारण है कि पैसे वालो को कोई कानून का खौफ नही है ।  वही अन्याय के खिलाफ लडने की मंशा पर न्यायधीश ही आफ द रिकार्ड यह बोलता नजर आए कि सत्तर साल तक लडते रहे तो यह व्यवस्था के खिलाफ है या सहयोग समझ से परे । कुल मिलाकर हम ऐसे ही न्यायिक व्यवस्था पर निर्भर है ।  यही कारण है कि अपराध पर अपराध कर लोग जमानत ले लेकर वही काम करते रहते है ।  पर हर मामलो मे जमानत सुविधा उपलब्ध रहती है ।  यही कारण है कि हमारे लोकतंत्र के मंदिर पर जमानत पाये हुए लोग संवैधानिक पदो पर बने हुए है ।  क्योकि उन्हे अभी तक अपराधी नही माना गया है । फिर से विषय पर अभी के मामले ने तो निराश ही किया है और साबित भी कर दिया कि कानून सबके लिए समान नही है । निश्चित आपका पैसा आपकी हैसियत यही कानून की दिशा तय करता है ।  यही आपको ख्यातिनाम वकील उपलब्ध कराता है ।   जो आपको पूरी तरह कानून की किसी भी बाधा का कवच तो उपलब्ध करा ही देता है । देश ने एक रूपया लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय मे कुलभूषण जाधव को इंसाफ दिलाते हुए वकील को देखा  है । वही यूपीए के समय अंतरराष्ट्रीय कोर्ट मे अपने यहां के वकीलो को छोडकर पाकिस्तान के वकील को अपना केस देकर अपना ही केस और कमजोर कर हारते हुए भी देश ने देखा है ।  वही आम आदमियो ने भी अपने केस को कमजोर कर हारते हुए देखा है यह क्यो होता है कहने की आवश्यकता नही है ।  कुल मिलाकर न्याय अभिजात्य लोगो के लिए ही है ।  फिर यह बंदे किसी का घर कब्जा कर ले कोई भी अपराध कर ले न्याय सुलभ है । इसलिए निम्न  व मध्यम वर्ग को अदालत मे न्याय पाने के लिए जद्दोजहद करते हर समय देखा जाता है ।  मिलती है तो ”  तारीख पर तारीख  “
बस इतना ही डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ 

(इस लेख के लेखक पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं यह उनके निजी विचार हैं)

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