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जिंदल स्टील पर NGT ने लगाया दो करोड़ का जुर्माना, नदी को पाट खड़ा कर दिया प्लांट, जानें मामला

जिंदल स्टील पर 2 करोड रुपए का जुर्माना ठोका गया है। यह कार्रवाई एनजीटी यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से की गई है। एनजीटी की ओर से कहा गया है कि उड़ीसा सरकार इस बात का हलफनामा दे कि आखिर जिंदल स्टील की ओर से नदी को हड़प कर प्लांट कैसे खड़ा कर दिया गया। दरअसल यह पूरा मामला जिंदल के अंगुल प्लांट का है और यह प्लांट ओड़िशा में स्थित है।

बताया जा रहा है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की कोलकाता बेंच ने ओडिशा के अंगुल जिले में नंदेरा नाम की नदी को हड़प कर वहां प्लांट खड़ा करने के मामले में सुनवाई करने के बाद जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड पर दो करोड़ रुपए का जुर्माना ठोका है। इस जुर्माने की रकम में से डेढ़ करोड़ रुपए जहां हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए खर्च किए जाएंगे तो वही 50,00000 रुपए प्रदूषण के नियंत्रण पर खर्च किए जाएंगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लालबाग कटक के आलेख चंद्र त्रिपाठी ने अपने अधिवक्ता शंकर प्रसाद पाणी के माध्यम से जिंदल स्टील एंड पावर के खिलाफ याचिका दायर की थी। दायर की गई याचिका में कहा गया था कि सन 2005 में जिंदल को अंगुल जिले के शंकरगंज इलाके में कैपटिव पावर तथा स्टील प्लांट के लिए उड़ीसा औद्योगिक विकास निगम ने भूमि आवंटित की थी। इस औद्योगिक क्षेत्र में ही नंदिरा नदी स्थित है। जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड ने अनाधिकृत रूप से नदी को हड़प लिया है।

नदी में मिट्टी पाटकर उसके ऊपर संयंत्र का निर्माण किया गया है। यह सब करने के पहले कंपनी की ओर से राज्य अथवा केंद्र सरकार के सक्षम पदाधिकारियों से इस संबंध में कोई अनुमति नहीं ली गई है। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में अंगुल जिले के राजस्व अधिकारियों कलेक्टर सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर शिकायत की थी।

इस मामले की 28 अप्रैल 2016 को जांच रिपोर्ट आई जिसमें जिला प्रशासन ने पाया कि जिंदल का संयंत्र नदी के ऊपर ही बनाया गया है। इसके लिए नदी को मिट्टी से भर दिया गया है।3 जनवरी 2005 को जिंदल के साथ एक एमओयू उड़ीसा सरकार के औद्योगिक विकास निगम के साथ हुआ था । जिसमें कंपनी को पट्टे में आवंटित भूमि निर्धारित की गई थी इसके बावजूद कंपनी ने निजी भूमि को भी अधिग्रहित कर लिया ।

बता दें कि नंदिरा नदी शंकरगंज के जंगलों से निकली है और इसमें एक सहायक नदी भी आकर मिलती है। आगे चलकर यह एक लघु सिंचाई परियोजना परंग में समाप्त होती है। जिंदल ने वैकल्पिक चैनल प्रदान करते हुए नदी को मोड़ दिया है । नदी को इसलिए काटा गया क्योंकि इससे उसे जलभराव की समस्या थी और संयंत्र की गतिविधि प्रभावित हो रही थी।

जेएसपीएल ने नदी के बहाव को मोड़ने के लिए कलेक्टर व जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के समक्ष प्रस्ताव दिया था। लेकिन उसे उसकी अनुमति नहीं मिल सकी थी। बावजूद इसके जेेएसपीएल में मनमानी और दबंगई के साथ संयंत्र के लिए नदी पाट दी गई । ओडिशा विधानसभा की लोक लेखा समिति की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि नंदिरा नदी के जल बहाव को नष्ट कर दिया गया है ।

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