कोविड-19 के खिलाफ प्रभावी नहीं है हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन, शोध कर बताया चीनी वैज्ञानिकों ने यह
दुनियाभर के सरकारों ने कोरोना रोगियों के इलाज के लिए मलेरिया रोधी दवा हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के इस्तेमाल का समर्थन किया है। लेकिन, एक नया अध्ययन बताता है कि मरीजों में इस वायरस के स्तर को कम करने में यह प्रभावी नहीं हो सकता है।
बता दें कि चीन के शंघाई जिओ टोंग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कोविड-19 के 150 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया और उन्हें दो समूहों में बांटा। शोधकर्ताओं ने बताया कि 75 मरीजों के एक समूह को हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के साथ-साथ नियमित देखभाल के लिए सौंपा गया था और शेष 75 लोगों की मानक तरीके से देखभाल की गई। दोनों समूहों को सरकार द्वारा नामित 16 उपचार केंद्रों में रखा गया था। डॉक्टरों ने तीन दिनों के लिए प्रतिदिन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का 1200 मिलीग्राम डोज बनाए रखा। इसके बाद 800 मिलीग्राम का डोज दिया गया।
शोधकर्ताओं ने कहा, हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के परिणामस्वरूप कुछ नैदानिक लक्षणों का उन्मूलन हो सकता है, लेकिन कोरोना वायरस के स्तर को कम करने में मानक देखभाल से यह बेहतर नहीं हो सकता। प्रयोगशाला में हुए अध्ययनों से पहले पता चला था कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना से लड़ने में सक्षम है। लेकिन, चीन के वैज्ञानिकों का कहना है कि उनके निष्कर्ष इसके विपरीत हैं।
गौरतलब है कि कोरोना वायरस के इलाज में काम आने वाली दवा हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) की आपूर्ति को लेकर भारत अभी दुनिया का सबसे अग्रणी देश बन गया है।
बता दें कि 55 देशों ने भारत से इस दवा को खरीदने का आग्रह किया है। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली और गुआना, डोमिनिक रिपब्लिक, बुर्कीनो फासो जैसे गरीब देश भी हैं जिन्हें भारत अनुदान के तौर पर इन दवाओं की आपूर्ति करने जा रहा है।
अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन ने कोविड-19 के उपचार के लिए संभावित दवा के रूप में हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन की पहचान की है। यही नहीं न्यूयार्क में 1,500 से अधिक कोरोना वायरस संक्रमण के मरीजों पर इसका परीक्षण भी किया जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस दवा की आपूर्ति को लेकर चेतावनी दी थी कि यदि भारत उनके निजी अनुरोध के बावजूद इस दवा के निर्यात की अनुमति नहीं देगा तो उसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जा सकती है।



