विदेश यात्रा संस्मरण – स्विट्जरलैंड का वह प्रसिद्ध जगह जूनफ्राऊजा जाने की बस एक ही जगह

हमने करीब सौ किलोमीटर की यात्रा कर अमूमन तीस बततीस के करीब छोटे बडे टनल को पार कर अपनी इस रोचक यात्रा के बाद अपने गंतव्य स्थान इंटर लाॅकन पहुंच गए। चारों तरफ से हरे भरे स्थान और चारो तरफ हरियाली से आच्छादित पहाडों के बीच इंटर लाॅकन ही देख कर आनंद आ गया। जगह की कोई कमी नहीं इसलिए पार्किंग भी काफी बड़ी थी । पूरे पार्किंग मे एक से एक गाडिया खडी थी वहां जाकर हमारी भी गाडी पार्क हो गई वहीं कुछ बसें भी टूरिस्ट लोगों के कारण भी दिखी। कयोंकि यह पर्यटन का बहुत महत्व पूर्ण जगह है तो करीब सभी टूरिस्ट इसे अपने कार्यक्रम मे जरूर शामिल करते है । एक सुरम्य वादियों मे एक छोटा सा स्टेशन और स्विट्जरलैंड का वह प्रसिद्ध जगह जूनफ्राऊजा जाने के लिए यही एक मात्र जगह है ।

इंटर लाॅकन का यह स्टेशन देखने मे ही बहुत अच्छा लग रहा था। सामने मे दो टिकट का काऊंटर था बस अपने देश जैसे ही काऊंटर पर एक एक मे मुश्किल से चार पांच लोगों की ही लाइन लगी थी। हम लोगों के लिए तो यह आश्चर्य का विषय था क्योकि अपने यहां तो चाहे पहले जब स्टेशन मे जाओ या सिनेमा या फिर कहीं भी टिकट लेने जाओ ऐसा दृश्य देखने को शायद मिले । हम जब तक लाइनों मे न लगे तब तक कहीं का टिकट नहीं मिल सकता । बस तुरंत ही नंबर आ गया और चार टिकट ले ली गई। अब मै स्टेशन से कुछ परिचित कराऊं एक बहुत सा सामान्य सा स्टेशन कुछ अंदर की तरफ बेंच यात्रियों के बैठने के लिए वयवस्था थी । नैरो गेज की ट्रेन थी इसलिए जैसे अपने यहां चाहे आप नैरो गेज के स्टेशन अभनपुर कुरूद या फिर अब बंद हो गया है गोंदिया से जबलपुर तक छोटे स्टेशन देखे है उनकी याद आ जाएगी। उल्लेखनीय है कि यहां सिर्फ दिन मे ही यात्रा है तो पूरी चहल कदमी दिन की ही रहती है । बहुत कम कर्मचारी और बहुत साफ सुथरा स्टेशन था । मै तो बाहर भी और अंदर भी बहुत घूम कर हर जगह को अच्छा से देखा। क्या फर्क है यह जानने की ज्यादा उत्सुकता थी । चलो आगे अब ट्रेन और कल उस सुरम्य वादियों के बारे मे बात करेंगे । क्रमशः
बस इतना ही डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




