आलेख – बसपा को सही में ब्राह्मण से इतना ही लगाव है तो कह दे यह – डॉ चंद्रकांत रामचंद्र वाघ
कल तक राजनीतिक दृष्टि से उपेक्षित आज यह ब्राह्मण अब राजनीति के सत्ता के लिए हाॅट केक बन गया है । यह चौदह प्रतिशत का केक के लिए सभी लोगों की लार साफ दिखाई दे रही है । पर इन लोगों को मालूम होना चाहिए भले कोई भी राजा रहा हो पर सत्ता की बागडोर दिशा निर्देश ब्राह्मण ही किया करता रहा है । चाहे आजादी के पहले हो या बाद मे । आज भी प्रशासन के हर अंग मे यह दखल साफ दिखाई देती है । चलो आज के राजनीतिक हालात पर आया जाए सभी दलों का अब ब्राह्मण प्रेम सरे-आम उजागर हो रहा है । पर एक बात तय है वैसे कितना भी गरीब ब्राह्मण हो पर अशिक्षा से उसका दूर दूर तक संबंध नहीं रहा है । वह मुश्किलातमे भी कुछ न कुछ जरूर पढेगा। कैसा भी आम ब्राह्मण हो उसमे राजनीतिक निर्णय लेने की काफी क्षमता रहती है । इसलिए मुझे नहीं लगता कि कोई भी ब्राह्मण इस झांसे मे कभी भी नहीं फंसेगा। एक बात और साफ करता चलूँ कि ब्राह्मण इतिहास और पुरानी बातों को कभी भी नहीं भूलता । यह पार्टीया इनको याद रखना जरूरी है । मै इनको याद दिला दू कि रावण भी ब्राह्मण था पर रावण के गलत होने के कारण ब्राह्मण ने उस समय भी राम के सत्य का साथ दिया आज तक श्री राम के मंदिर के लिए भी खडे रहे है साथ ही रहे है । वहीं रामायण को वाल्मीकि ने लिखा था । दलित वाल्मिकी के रामायण को हर ब्राह्मण ने शिरोधार्य किया । आज भले ब्राह्मण को दलितों का विरोधी बताया जाए पर ब्राह्मण ने हर समय विद्वता का आदर किया है । चाहे वह किसी वर्ण विशेष से हो । यह वाल्मीकि मुनि द्वारा रचित रामायण को स्वीकार कर लेने से ही सिद्ध हो जाता है । मै पुनः विषय पर आऊं इन सत्तर साल मे ब्राह्मण को किसने हासिये मे रखा । सभी दल इसके लिए बराबर के जिम्मेदार है । सब आज आंसू लेकर खडे है । अभी तक इन दलों के रणनीति कारों ने अपने सब प्रयोग कर लिया अब यही प्रयोग बचा था । पर अब इस देश के लोगों में राजनीतिक जागरूकता आ गई है। फिर ब्राह्मण तो वैसे ही चेतन है । मुझे कहीं लिखने मे संकोच नहीं है कि ब्राह्मण का किसी ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है तो वह ब्राह्मण ही है । दुर्भाग्य से अपनी सत्ता बचाने के लिए ब्राह्मण का ही उपयोग किया है । आज बहुजन समाज वादी पार्टी ने ही अयोध्या से ब्राह्मण समाज का सम्मेलन कर उसका आगाज़ किया है । अब यह मथुरा काशी और चित्रकूट में भी होने वाला है। क्या यह कह सकते है कि मथुरा और काशी मे जो मस्जिद है वह मंदिरों को धवस्त कर बनाई गई थी यह हर ब्राह्मण का मानना है । वहीं योगी जी के शासन काल मे चार सौ ब्राह्मण के एनकाउन्टर पर प्रश्न उठाया जा रहा है कभी भी कोई भी ब्राह्मण गलत के साथ कभी भी नहीं खडा रहा है। अगर वह गलत है तो रावण पहले भी मारा गया आज भी मारा जाएगा। कोई भी ब्राह्मण कभी भी गलत का साथ नहीं देगा। कैसे कोई किसी भी चौदह पुलिस वालो को अपने गोली का निशाना बना सकता है । इसलिए यह मुद्दो का कोई औचित्य ही नहीं है । वहीं यह पार्टीया अपने वोटों के लिए खुलकर आतंकवादीयों के साथ खुलकर खडे नजर आते हैं। यहां तक रात को सर्वोच्च न्यायालय तक खुलवाते है । कल तक जिनका नारा ही था ” तिलक तराजू और तलवार, इनको मारों जूते चार ” कैसे कोई भूल सकता है। फिर सुश्री मायावती बहन जी का हर भाषण मे मनु स्मृति को कोसना कैसे कोई ब्राह्मण भूल सकता है । भले ही किसी नेता ने मनु स्मृति न पढी हो पर अपने वोटों के लिए उसे कोसने मे कोई कसर बाकी नहीं रखी । अब समाजवादी पार्टी इनकी पूरी राजनीतिक समीकरण ही एम वाय मे उलझा रहा है । इस समाज के वोटों से कोई लेना देना नही रहा है। पर बसपा की नजरें इनायत होने पर इनका भी ब्राह्मण प्रेम जागना समय की मांग है । अब कांग्रेस पर आया जाये कई बार बंद कमरे मे कहा कि हम मुस्लिम पार्टी है और सियासत भी दस साल उनको ही ख्याल रखकर ही की गई है । इसलिए भगवा आतंकवाद तक रचा गया था । यह कितने ब्राह्मण है यह इससे पता चल जाता है कि कुर्ते के उपर जनेऊ पहनकर इन्होंने सबूत भी दे दिया है । वहीं ओवैसी की पार्टी खुलकर अपनी बात करते है । बची भाजपा यह तो हिंदू पार्टी होने से इंकार भी नहीं करती । पर ब्राह्मण का भी कोई विशेष ख्याल रखा हो यह भी नहीं है । कुल मिलाकर यह सत्ता ही है जो इनको ब्राह्मण प्रेम करने को मजबूर कर रहा है । कोई भी ब्राह्मण दलित का विरोधी नहीं रहा है । पर कम से कम उन दलित को तो आरक्षण से बाहर तो रखा ही जा सकता है जो सवर्ण से आर्थिक स्थिति मे बेहतर है । जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी क्रीमी लेयर कहा है । जो आरक्षण दस साल तक के लिए था आज सत्तर साल के बाद भी वही स्थिति है । इसमें मेघावी युवा छात्रों के साथ दशकों से अन्याय हो रहा है। जिसके चलते गुजरात मे एक बहुत बडा छात्र आंदोलन भी हुआ था। पर इससे इन सियासत दानों का क्या लेना देना । कोई भाड़ मे जाए पर राजनीति इनकी चलते रहनी चाहिये। क्या बहुजन समाज पार्टी मे है हिम्मत कि उन्हे सही मे ब्राह्मण से इतना ही लगाव है तो कह दे कि वह आर्थिक आरक्षण के पक्ष मे तो है पर वह योग्यता के आरक्षण के खिलाफ है तो उनके बातों मे सच्चाई दिखेगी । किसी पर इस समाज को इन पर विश्वास नहीं है । जिस दिन काम हो जाएगा कौन ब्राह्मण कैसा ब्राह्मण वहीं अन्याय करने वाला ब्राह्मण ही याद रहेगा । दोस्तो मैने अपनी बात रख दी । मैंने अपने चिकित्सकीय जीवन मे दलितो के बीच मे चार दशकों मे बहुत काम किया है। मैने ही क्या सभी लोगों ने अपने कर्तव्यो का निर्वहन किया है । इस राजनीति ने ही अपने राजनीतिक फायदे के लिए दलित सवर्णो में मतभेद पैदा किया है । आज उत्तर प्रदेश में इस वोट की महती आवश्यकता ही उन्हे अपने पिछले स्टैंड से वापस होने को मजबूर कर रही है । मै इन दलों को यह बता दूं कि कौटिल्य शास्त्र किसी और ने नहीं चाणक्य ने रची इसलिए हर ब्राह्मण मे चाणक्य का अंश तो मौजूद ही रहता है । बस राजनीति जो न कर ले कम है ।
बस इतना ही । डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




