आलेख – क्या यही लोग छत्रपति शिवाजी महाराज के बताये रास्ते पर चल रहे है। डॉ.चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ
आज यह लेख मै कहां से शुरू करूं यह समझ नहीं आ रहा है । क्या यही लोकतंत्र है ? क्या यही लोग छत्रपति शिवाजी महाराज के बताये रास्ते पर चल रहे है । दोनों के प्रश्नों का उत्तर सबको मालुम है । कुल मिलाकर दिवालिया लोगों की पार्टी बनकर रह गई है । कुल मिलाकर जिस पार्टी मे सिर्फ परिवार की चलती है वहां तो लोकतंत्र वैसे ही हासिये मे आ जाता है । यहां तो नेताओ के नाम से सिर्फ चाटुकार ही रह जाते है । यही कारण है कि परिवार पर चलने वाली पार्टीयो के चलने का तरीका एक जैसा ही होता है । इसी कारण स्व. बाला साहेब ठाकरे के सिद्धांत पर जिस तरह से बखिया उधाडी गई पर एक भी शिवसेना का नेता खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं दिखी । अब इस पार्टी का पतन निश्चित है । सरकार जिस तरह से काम कर रही है वो लोकतंत्र मे कभी भी उपर्युक्त नहीं है । दुर्भाग्य यह है यहा की अघाडी सरकार जिसमे शामिल पार्टियां कांग्रेस और एनसीपी के नेता भी मूककदर्शक बन कर खडी है । शरद पवार भी लोगों की प्रतिक्रिया देखकर बोले वो भी कोई मायने नहीं रखता है । निश्चित महाराष्ट्र सरकार अब हर बार विवाद में पडती जा रही है । काम ही करना था तो पालघर वाले मुद्दे पर करना था । पालघर मुद्दे पर तो कहीं जांच दिख नहीं रही है । कुल मिलाकर उसे ठंडे बस्ते में डालने का काम किया है । वैसे ही फिर इन लोगों ने सुशांत सिंह राजपूत का केस मे भी पालघर वाले ही चाल चली पर वो नहीं चल पाई । सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर सीबीआई जांच एजेंसियों को सौपने के बाद महाराष्ट्र की अघाडी की सरकार सख्ते मे आ गई है । पर सुशांत सिंह राजपूत का केस के समर्थन में खुलकर कंगना आई जिसके कारण महाराष्ट्र सरकार व शिवसेना के नेता उसके खिलाफ हो गये । शिवसेना के सांसद संजय राऊत जिस निचले स्तर पर गये है वो दुर्भाग्य जनक है । पूरी संसदीय परंपरा को तार तार किया है । कंगना के खिलाफ सिर्फ वयकतवय तक रहता तो ठीक था । पर यह निजी दुश्मनी मे बदल गया । जब उन्हे मुंबई मे आने से रोका गया तो उन्होंने अपने ही तरीका से मुंबई आनें की बात कर शिवसेना का जो खौफ था उसे उसने पूरी तरह से नजरअंदाज कर शिवसेना को ही बचाव की मुद्रा में आने को विवश कर दिया । फिर उसमें केंद्र सरकार ने वाय प्लस की सुरक्षा मुहैया कर महाराष्ट्र सरकार को ही बैकफुट मे आने पर विवश कर दिया । मजे की बात तो यह है सुशांत सिंह राजपूत का केस में रिया चक्रवर्ती को मुंबई पुलिस की सायरन गाडी वाली सुरक्षा वहीं कंगना को आने से रोकने के लिए पूरी ताकत ही लगी दी । पर कंगना का उसके आनें के पहले बीएमसी द्वारा तोडफोड कर अपने विरोध करने वालो को हश्र क्या होता है यह दिखा दिया है । कुल मिलाकर बुलडोजर ही चला दिया । पर यहां मैंने फिल्मी कलाकारों के दोगलापन भी देख लिया । जब आमिर खान शाहरुख खान नसीरुद्दीन शाह जब भारत मे डर लगता है कहते है तो पूरे विपक्ष के मुंह में लकवा मार जाता है । आज कंगना के मामले मे एवार्ड वापसी गैंग और बोलने की आजादी वाली गैंग कहा है । ये लोग सिर्फ तमाशा देखने वाले है इनहोने अपनी फितरत बता दी है । वही महाराष्ट्र सरकार जिस तरह से व्यवहार कर रही हैं वो न्यायोचित नहीं है । पर यह सत्य है कि कंगना पूरी सरकार पर भारी पड़ रही है । कंगना का यह कथन कि ” आज मेरा घर टूटा है पर एक समय आयेगा जब तुम्हारा घमंड टूटेगा । ” पर एनसीबी की कार्यवाई से बालीवुड मे एक भय व्यापत हो गया है । आने वाला समय बताएगा कि कौन कौन से कलाकार नशे में लिप्त हैं जिसके संबंध नेताओं से भी है । यह बहुत बडी चिंता है । बस इतना ही
डा .चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




