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रूस-यूक्रेन की जंग छिड़ने पर अन्य देशों के हजारों लोग फसे,कानों में गूंज रहे मिसाइलों के धमाके,अफरा-तफरी का माहौल…. – cgtop36.com


नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन की जंग छिड़ने पर अन्य देशों के हजारों लोग वहां से निकलना चाहते हैं। यूक्रेन में अकेले भारत के ही 20 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं, जिनमें ज्यादातर स्टूडेंट्स हैं। युद्ध के चलते स्थिति गंभीर होने पर वे किसी भी तरह वहां से निकलना चाहते हैं। यूक्रेन में फंसे कई भारतीय स्टूडेंट्स ने वीडियो कॉल कर आपबीती सुनाई है। हमें लगातार मिसाइल के धमाके सुनाई दे रहे हैं। जान बचाने के लिए हम सब बंकर में छिपे हैं। डर का माहौल है और हर तरफ अफरा-तफरी मची है। किसी को नहीं पता कि आगे क्या होगा। हम अपने देश भारत पहुंच भी पाएंगे या नहीं। यूक्रेन के चेर्नित्सि शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रहीं मनीमाजरा की तेजस्विनी ने जब यह बात अपने परिजनों को बताई तो सभी सहम गए।

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परिजनों को अब अपनी बेटी की सुरक्षा की चिंता सता रही है। उधर, 22 फरवरी को यूक्रेन से सही सलामत लौटीं सेक्टर-48 निवासी सरगम ने बताया कि यूक्रेन में अब हालात भयावह हैं। शुक्र है कि मैं समय रहते स्वदेश लौट आई लेकिन वहां अभी बड़ी संख्या में भारतीय छात्र फंसे हैं। सरकार को जल्द ही कोई कदम उठाना चाहिए। विदिशा की सृष्टि विल्सन भी यूक्रेन की राजधानी में फंसी है। रूस ने कीव पर हमला कर दिया है। वह कई इलाकों में बमबारी कर रहा है। सृष्टि कीव में फंसी हैं। रूस के हमलों से बचने के लिए हजारों लोगों ने बंकर में शरण लिया है। सृष्टि भी उनलोगों के साथ बंकर के अंदर ही है।

उनकी मां विदिशा में रहती हैं। मां से सुबह में फोन पर बात हुई थी। इस दौरान सृष्टि ने कीव का हाल बताया है। बताया कि मम्मी मैं बंकर में हूं। सामने वाली बिल्डिंग पर बम गिर रहे हैं। आपलोगों घबराना मत। हमलोग बंकर में ठीक है। इसके बाद सृष्टि विल्सन ने अपना फोन बंद कर लिया। उसने मां को बताया कि बंकर के अंदर नेटवर्क और अन्य चीजों की दिक्कत है। ऐसे में फोन को बंद कर ले रही हूं। फिर बात करूंगी।

एक स्टूडेंट के पिता कौशिकभाई देसाई का कहना है कि, ‘मेरा बेटा मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गया था। आज सुबह बात की तो उसने बताया कि माहौल बहुत खराब है।’ पिता कौशिक भाई ने कहा, ‘फ्लाइट कैंसिल होने के चलते उसका वापसी का टिकट भी रद्द कर दिया गया है। बेटे ने हमें बताया कि, यहां हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। कुछ दिनों में खाने-पीने के सामान की भी दिक्कत होने लगेगी। एटीएम खाली हो गए हैं, इसलिए बच्चों के पास खर्च के लिए पैसे तक नहीं बचे हैं।’



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