चाणक्य निति की इन बातों का करें पालन तो माँ लक्ष्मी का सदा रहेगा आशीर्वाद

चाणक्य की गिनती हिंदुस्तान के श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है। उनका संबंध विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालयय से था। उन्होंने तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की एवं पश्चात में वे इसी विश्वविद्यालय में आचार्य बने। उन्हें अनेक ग्रंथ और शास्त्रों का ज्ञान था।
कूटनीति शास्त्र, समाज शास्त्र, राजनीति शास्त्र एवं अर्थशास्त्र जैसे अहम विषयों के भी चाणक्य मर्मज्ञ थे। उन्होंने अपने अनुभव और अध्ययन से पाया कि भौतिक जीवन में लक्ष्मी का आशीर्वाद जिसके पास नहीं है, उसके पास सुखों की कमी बनी रहती है। धन की कमी में ऐसे लोगों का जीवन संकटों से घिरा हुआ रहता है।
आचार्य चाणक्य कहते है की जो व्यक्ति अत्यधिक क्रोध करने वाला होता है उसे कभी भी शांति नहीं मिल सकती. वह अपनी लाइफ में हमेशा परेशान ही रहता है. गुस्सा करना कभी भी हमारे लिए बेहतर नहीं होता. इसका अंजाम हमेशा ही बुरा होता है. क्रोध करने से कोई भी बात बनती नहीं है बल्कि बिगड़ जाती है. क्रोध करने वाले व्यक्ति का गुस्सा शांत हो जाता है तो उसे पछताना पड़ता है. जिस व्यक्ति को गुस्सा आता है उसके साथ कोई भी रहना नहीं चाहेगा. हर कोई उससे दूर ही रहता है।
ऐसे लोगो के दोस्त भी बहुत कम होते है, इसलिए गुस्सा करना हमारे लिए बिलकुल भी फायदेमंद नहीं है. यह एक ऐसी गन्दी जड़ है जो कई अच्छे – अच्छे रिश्तो को भी पल भर में तोड़ देती है. सही काम को बिगाड़ देती है. इसलिए मित्रो जब भी आपको गुस्सा आये इसे कण्ट्रोल करे. अगर control नही होगा तो यह आपको बार – बार नरक का अहसास कराएगी।
चाणक्य के अनुसार जीवन में लक्ष्मी का आर्शीवाद लेने हेतु इन बातों को जीवन में उतारे चाणक्य के मुताबिक लक्ष्मी आलसी शख्स को नापसंद करती हैं। लक्ष्मी हमेशा उस शख्स को अपना आर्शीवाद देती हैं जो स्वच्छ और आलस से दूर रहता है। मेहनत करने वालों को लक्ष्मी ज्यादा पसंद करती हैं। जो व्यक्ति समय पर अपने कार्यों को पूर्ण करता है एवं अपने सभी कार्यों को ईमानदारी से करता है उस पर ही लक्ष्मी की कृपा होती है।
आज के समय में बच्चो को घरो में वे संस्कार नहीं मिल पाते जिनकी जरूरत हर बच्चे को होती है. वे संस्कार ही होते है जो एक बच्चा बड़ा होकर एक आदर्श नागरिक बनता है. इन संस्कारो में एक बात अहम होती है और वह है की दूसरो के साथ हमेशा ही मीठे शब्दों में बातें की जाए और सभी से अच्छे से व्यवहार करे. लेकिन आज लोगो को अपने बच्चो को देने के लिए समय ही नहीं होता. जिस कारण वे अपने बच्चो को सही संस्कार नहीं दे पाते।
चाणक्य के मुताबिक जिस शख्स की भावना परोपकार की होती है और सदैव दूसरों की सहायता हेतु खड़ा रहता है ऐसे लोगों को लक्ष्मी कभी नहीं छोड़ती हैं। लक्ष्मी ऐसे लोगों को अपना आशीर्वाद देती हैं। इसके साथ ही पैसा आने पर जो व्यक्ति परोपकार की भावना को भूल जाता है उसका साथ लक्ष्मी काफी शीघ्र छोड़ देती हैं।



