आलेख – हम बाजार वाद के बनाए 14 फरवरी को सिर्फ वेलेंटाइन डे तक ही सीमित रह गए – cgtop36.com

डा. वाघ की वाल से आज अपनी बात पर आखिर 14 फरवरी है क्या ? चलो इस पर ही बात की जाए । आज हम बाजार वाद के बनाए 14 फरवरी को सिर्फ वेलेंटाइन डे तक ही सीमित रह गए है । हमारी युवा पीढी भी दुर्भाग्य से इसके गिरफ्त मे आकर सिर्फ प्यार का इजहार का दिन ही समझती है । इसके पीछे कार्ड गिफ्ट फिर विज्ञापन का चक्र भी इसमे शामिल है । खैर आज मै 14 फरवरी के दूसरे पहलूओ के इतिहास पर आप लोगो का ध्यान आकर्षित करता हू । 14 फरवरी को ही मुगल शासक अकबर तेरह साल के उम्र मे जहांपनाह बने थे । वैसे आज के दिन पर और भी बाते है पर वह ज्यादा जगह लेख मे लाने के लिए मुझे उपर्युक्त नही लगा । पर इतिहास का वह दिन 14 फरवरी सन 1931 ब्रिटिश शासन के कोर्ट ने देश के तीन नायाब हीरो को वह कोई और नही देश के अनमोल रत्न भगतसिंह राजगुरू सुखदेव को फांसी की सजा सुनाई थी । चौदह फरवरी को तय हो गया था की इन क्रांतिकारीयो को ज्यादा दिनो तक ब्रिटेन के शासन रखने के पक्ष मे नही थे डरे हुए थे । अहिंसक के पक्षधर बिल्कुल मौन थे शायद यह उनकी राजनीतिक मजबूरी थी । दुर्भाग्य से इन क्रांतिवीरो ने जहां माफी मांगने से इंकार कर दिया पर कटु सत्य यह है की अहिंसक स्वतंत्रता आंदोलन के पैरोकार को अंग्रेजो का यह हिंसक चेहरा जहां नही दिखा वही उन्होने विरोध तक की रस्म तक नही निभाई यह स्वतंत्रता के पीछे की राजनीतिक कहानी का भी साक्ष्य है । यह दिन भारतीय कभी भी नही भी नही भूल सकते । 14 फरवरी 1952 हमारे देश की कुशल पूर्व विदेश मंत्री प्रभावशाली वक्ता प्रखर सांसद वह कोई और नही पद्म विभूषण स्व. श्रीमती सुषमा स्वराज जी का भी जन्मदिवस भी है । जिन्होने भारतीय राजनीति मे उनके योगदान से देश भी परिचित है । 14 फरवरी 2019 पुलवामा सेना पर हमला जिस पर हमारे सेना के 44 सैनिक शहीद हुए। यह भारत के लिए काला दिन था जब हमारे सेना के इतने सैनिक शहीद हो गए । आज भी चौदह फरवरी इन सैनिको की याद आ जाती है। बस आप लोगो को ही हम कौन से चौदह फरवरी को याद रखे ।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ



