आलेख – मुफ्त की राजनीति कभी भी सिद्धांत के सामने नही खडे हो पाती – डॉ. वाघ – cgtop36.com

डा. वाघ की वाल से आज अपनी बात पर एक हिन्दी का बहुचर्चित मुहावरा ” जैसा बोओगे वैसे ही पाओगे “। कहते है सब यही है सब यही चुकता कर जाना है । कल तक आपने दूसरो के लिए जो किया बस आज आपके साथ हो रहा है । पहले आपके बाण के तरकश से लोग कुछ नही कह पाते थे बस आज आप अपने ही पूर्व साथी के बाण के तरकश से घायल है । आपने भी बहुत लोगो के राजनीति का ढिंढोरा पीटा बस आज आपका पीट रहा है । पर इससे कितना नुकसान होता है वह भी राजनीतिक हलको मे शायद इसका अहसास आपको अब हो रहा है। मै यह बात दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी की बात कर रहा हू । किसी समय केजरीवाल जी अन्ना आंदोलन के संयोजक थे । लगा था भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नये जननेता का जन्म हुआ है । काफी उम्मीद थी उस समय तो ऐसा था लोगो ने अपना कैरियर तक नही देखा । आंदोलन की सफलता से सरकार के चूले भी हिल गए थे । इस आंदोलन का फायदा अप्रत्यक्ष रूप से मोदी जी को भी हुआ है। पर इस देश को जिस तरह के नेता की खोज थी हमे ऐसा लगा की हम उसके करीब ही पहुंच गए । पर यह धोखा था यह सब बडे राजनीतिक प्लान के तहत किया गया था । अन्ना जी भी महात्मा गांधी जी की तरह किसी तरह के राजनीतिक दल बनाने के पक्षधर नही थे । न उस समय अपने राजनीतिक फायदे के लिए उनकी बात नही सुनी गई न अभी भी नही सुनी गई। आप अस्तित्व मे आ गई यह भी बिल्कुल कांग्रेस के समान धर्मनिरपेक्ष पार्टी मे अपने को स्थापित करने लगी । वही भ्रष्टाचार की जिस आंदोलन की अलक जगाई बाद मे उन्ही के साथ हाथ मे हाथ डालकर गलबहियां करने लगे । अब लक्ष्य बदल गया भ्रष्टाचार की जगह मोदीजी दिखाई देने लगे इसे राजनीतिक भाषा मे सांप्रदायिक ताकतो के साथ लडने वाली बात कहा गया । खैर आंदोलन के समय छापामार पद्धति से भ्रष्टाचार के आरोप जो लगाये गये बाद मे सभी ने मानहानि का केस किया तो स्व.अरूण कुमार जेटली जी श्री नितीन गड़करी जी श्री सरदार विक्रम मजीठिया जी श्री कपिल सिब्बल से माफी मांग कर अपने शब्द वापस लिये गये है । अभी जो बचे है उनके केस अभी भी चल रहे है । शायद यह लोग भी इन लोगो से माफी मांग कर इन समस्याओ से निजात पाना चाहते है । पर अब तो जो आरोप लग रहे है वह विश्वास के साथ विश्वास जी ही लगा रहे है । इस समय आरोप लगाने वाले पर ज्यादा विश्वास है जनता को । जब केजरीवाल जी ने आरोप लगाए तो तत्कालीन नेता मानहानि के लिए चले गए पर अभी तो बिल्कुल सन्नाटा छाया हुआ है । वैसे भी मुफ्त की राजनीति कभी भी सिद्धांत के सामने नही खडे हो पाती है । समय का परिवर्तन देखो जो कल तक दूसरो को निर्दोष होने के लिए सबूत मांगता फिरता था आज उसे भी उसी कटघरे का हिस्सा होना पड रहा है । पहले तो सिर्फ भ्रष्टाचार पर यहां तो देश विखंडन करने का गंभीर मुद्दा है । सरकार को इस पर गंभीरतापूर्वक कार्यवाही करनी चाहिए पता लगना चाहिए की इनके पीछे कौन सी ताकते है । आप स्वीट आतंकी है या कुछ यह जनता तय कर देगी । पर दूसरो के बेगुनाही का सबूत मांगने वाले अब अपने समय आने पर विकटिम कार्ड खेलने की नौबत आ रही है । राजनीतिक विवशता देखो कल तक सब दल मोदी जी के खिलाफ लामबंद थे पर पंजाब के मामले मे फिर इनके खिलाफ है । पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा गृहमंत्री से जांच की मांग वही गृहमंत्री द्वारा देख लेने की बात मामले की गंभीरता को दिखाता है । चुनाव के बाद राजनीति क्या होती है आने वाला समय बताएगा । पर लोगो को कम से कम फ्री की राजनीति से निजात मिलना चाहिए । ” यह देखना चाहिए की हम देश के लिए क्या कर रहे है पर दुर्भाग्य यह है रह हो रहा है हमारे लिए देश क्या कर रहा है । ” शायद ही कोई दल इस पर काम करे ।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ



