प्रदेश के 19000 पटवारी सामूहिक अवकाश पर, कामकाज हुवा ठप्प |

मध्यप्रदेश के 19000 पटवारी सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। मध्य प्रदेश के पटवारी संघ ने ऐलान किया है कि अपनी मांगों को लेकर और सीधी-सिंगरौली जिले में कलेक्टर द्वारा पटवारियों पर की गई कार्रवाई के विरोधस्वरूप वो सामूहिक रूप से तीन दिन की छुट्टी पर जा रहे हैं। 425 तहसीलों के सभी 19 हजार पटवारियों के छुट्टी पर जाने से इनसे जुड़े सभी काम प्रभावित होने की आशंका है।
इनकी प्रमुख मांग है ‘समान वेतन समान कार्य।’ ये 2800 का ग्रेड पे दिए जाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही इनका कहना है कि पटवारियों के पास काम अधिक है और संसाधनों की कमी है। विशेष भर्ती अभियान अंतर्गत नियुक्त 500 राजस्व निरीक्षकों द्वारा सीमांकन कार्य नहीं किया जा रहा है और इनके पास पहले से ही अधिक कार्यभार है।
गौरतलब है कि इससे पहले इन्होने मांग की थी कि मशीन से सीमांकन कार्य करने के लिए प्रशिक्षण दिलाया जाए। वहीं महाराणा प्रताप जयंती पर सीधी सिंगरौली जिले में पटवारियों के छुट्टी लेने पर कलेक्टर ने करीब 100 पटवारियों को अवकाश लेने पर सस्पेंड कर दिया। इससे नाराज पटवारी बुधवार 24 मई से तीन दिन यानी 26 मई तक सामूहिक छुट्टी पर चले गए हैं।
सामूहिक छुट्टी पर जाने से पहले इन्होने प्रशासन को ज्ञापन भी दिया था कि निलंबित पटवारियों को बहाल किया जाए, लेकिन इनकी मांग नहीं मानी गई। इनका कहना है कि पहली बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराणा प्रताप जयंती की छुट्टी का ऐलान किया था और वही छुट्टी लेने पर पटवारियों को निलंबित कर दिया गया। लेकिन बहाल करने की इनकी मांग नहीं मानी गई तो अंतत: ये सब मिलकर छुट्टी पर चले गए हैं।
पटवारियों का कहना है कि इसके लिए सीधी और सिंगरौली कलेक्टर जिम्मेदार है जिन्होने पटवारियों को बिना कारण बताओ नोटिस दिए सीधे निलंबित कर दिया, जबकि वो छुट्टी शासन द्वारा प्रदान की गई थी। अब प्रदेश भर में पटवारियों के तीन दिन की छुट्टी पर जाने के बाद कुल पांच दिन तक काम प्रभावित रहेगा। चूंकि ये शुक्रवार तक छुट्टी पर हैं और शनिवार-रविवार को सरकारी अवकाश होता है इसलिए प्रदेशभर के 19,000 पटवारियों के छुट्टी पर जाने से कामकाज बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।




