छत्तीसगढ़

कौन हैं उप-मुख्यमंत्री अरुण साव? जानिए उनके बारे में सबकुछ…


अरुण साव को भाजपा ने मुंगेली जिले की लोरमी विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया था। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी थानेश्वर साहू को 45 हजार से अधिक मतों से हराया है। वे वर्तमान में बिलासपुर लोकसभा से सांसद रहे। उन्होंने विधायक का चुनाव जीतने के बाद इस्तीफा सौंप दिया है।

13 दिसंबर 2023 को उन्होंने उप मुख्यमंत्री की शपथ ली। शपथ ग्रहण में पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत अन्य राज्यों से आये मुख्यमंत्री भी मौजूद थे।अरुण साव का जन्म 25 नवंबर 1968 को मुंगेली के लोहड़िया गांव में हुआ था। उनके पिता स्व. अभयाराम साव 80 के दशक में मुंगेली मंडल के अध्यक्ष रहें। तथा 1977 से 1980 तक जरहागांव विधानसभा के चुनाव संचालक रहें।

जनसंघी पिता से अरुण साव को बचपन से संघ के संस्कार मिले।अरुण साव कबीर वार्ड मुंगेली में रहकर पले–बढ़े है। मुंगेली के एसएनजी कॉलेज से बीकॉम कर बिलासपुर से एलएलबी किया। वह 1990 से 1995 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मुंगेली तहसील इकाई के अध्यक्ष रहे। फिर जिला 1996 में युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष, प्रांतीय सह मंत्री और राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य बने।

तत्कालीन विधायक अमर अग्रवाल के साथ महामंत्री भी रहें। ग्रेजुएशन के दौरान कॉलेज में सीआर ( कक्षा प्रतिनिधि) बनें। साहू समाज की राजनीति में भी अरुण साव की अच्छी पैठ है। साहू समाज युवा प्रकोष्ठ मुंगेली के तहसील सचिव के अलावा जिला अध्यक्ष साहू समाज भी रहें। छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू समाज के सह संयोजक बने अरुण साव की शादी मीना साव से हुई है। अरुण साव 1996 से 2005 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा मे विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे।

1998 में दशरंगपुर से जनपद सदस्य के लिए भाजपा समर्थित प्रत्याशी बनें। 2001 से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की स्थापना के साथ ही अरुण साव यहां वकालत कर रहें हैं। 2004 में राज्य सरकार के पैनल लायर, 2005 से 2007 तक उप शासकीय अधिवक्ता, 2008 से 2013 तक उपमहाधिवक्ता छत्तीसगढ़ शासन रहें। पिछली बार बिलासपुर लोकसभा से लखनलाल साहू सांसद निर्वाचित हुए थे।

read more- CG Breaking: छत्तीसगढ़ में आज से विष्णु राज, सीएम पद की ली शपथ, अरुण साव और विजय शर्मा ने ली डिप्टी सीएम की शपथ…

वे 1 लाख 76 हजार वोट से विजयी हुए थे। बावजूद इसके उनका टिकट काट कर अरुण साव को टिकट दिया गया और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अटल श्रीवास्तव को हरा कर जीत हासिल की थी। अगस्त 2022 को आदिवासी वर्ग के विष्णुदेव साय को हटा कर अरुण साव को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का पद सौंपा गया। प्रदेश में बड़ी संख्या में ओबीसी वोटो की बहुलता को देखते हुए अरुण साव को अध्यक्ष बनाना ओबीसी वोटों को साधने की कवायद के रूप में देखी जा रही हैं।अरुण साव को कुल 75070 वोट मिले है।

जबकि कांग्रेस प्रत्याशी थानेश्वर साहू को 29179 वोट मिले है। अरुण साव ने 45891 वोट से जीत हासिल की है। वही जोगी कांग्रेस 15910 वोट मिले है। पिछले चुनाव में यहां से चुनाव लड़ रहे धर्मजीत सिंह को 51608 वोट मिले थे। नोटा को यहां से 814 वोट मिले है। पिछले चुनाव में भाजपा ने यहां तोखन साहू को टिकट दिया था। पर उन्हें छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के धर्मजीत सिंह से हार का सामना करना पड़ा था।

अरुण साव सौम्य छवि के पढ़े लिखे व्यक्ति हैं। वकालत में दक्षता हासिल करने वाले अरुण साव डिप्टी एडवोकेट जनरल भी रहे थे। लोरमी विधानसभा क्षेत्र उनके संसदीय क्षेत्र बिलासपुर में आता है जहां से वह सांसद रहे। अच्छी छवि के अलावा कम के प्रबल दावेदार व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष होने का फायदा उन्हें मिला और क्षेत्र के लोगों ने उन्हें हाथों-हाथ ले लिया। अरुण साव की जीत का बड़ा फैक्टर कांग्रेस में बगावत भी रही।

लोरमी विधानसभा से मुंगेली जिले के कांग्रेस जिला अध्यक्ष सागर सिंह बैंस टिकट मांग रहे थे। टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बगावत कर छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस से चुनाव लड़ा और 15910 वोट काट दिए। लोरमी विधानसभा सीट के अस्तित्व में आने के साथ ही यहां 6 बार कांग्रेस, दो बार राम राज्य परिषद, एक बार जनता कांग्रेस ने जीत हासिल की है। भाजपा को यहां से छठवीं बार जीत हासिल की है।



Related Articles

Back to top button