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जीवन के हर रंग को गीतों में ढालने में माहिर शैलेंद्र! जानें कवि शैलेंद्र से जुड़े रोचक पहलू!  |


Shailendra’s 100th Jayanti 2023: जिस दौर को हिंदी सिनेमा संगीत का स्वर्णिम युग माना जाता है, उस दौर में साहिर लुधियानवी, कैफ़ी आज़मी, मजरूह सुल्तानपुरी, शकील बदायूंनी जैसे गीतकारों के गीतों की तूती बोलती थी, यद्यपि उनके शब्द उर्दू और फारसी में होते थे, यह धारणा पुख्ता थी कि उर्दू-फारसी के बिना गीत नहीं लिखे जा सकते. इस प्रथा को तोड़ा गीतकार शैलेंद्र ने. राज कपूर की फिल्म बरसात से पदार्पण करने वाले शैलेंद्र ने अनगिनत यादगार गीत रचे. Top 5 Bollywood Films Ruled the Box Office this Year: शाहरुख खान की ‘पठान’ से लेकर सनी देओल की ‘गदर 2’ जैसी इन 5 फिल्मों का इस साल बॉक्स ऑफिस पर दिखा दबदबा!

पंजाब के रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में 30 अगस्त 1923 में जन्मे शंकरदास केसरीलाल उर्फ शैलेंद्र बाद में मथुरा आ गये. 1947 में रेलवे की नौकरी ज्वाइन कर शैलेंद्र निश्चिंत हो गए कि सरकारी नौकरी से अपने जीवन को सेटल कर सकेंगे. लेकिन किस्मत से सिनेमा जगत से जुड़ गये, और एक अलग मुकाम हासिल किया. आज इस महान गीतकार की सौवीं जयंती पर जानें शैलेंद्र के जीवन के रोचक संस्मरण..वेल्डर ने रची मेलोडी! शैलेंद्र रेलवे वर्कशॉप में वेल्डर थे, कविता की कला अलहदा थी, सो मुशायरा आदि में भी जाते थे. एक मुशायरे में भारत-विभाजन पर उनकी रचना ‘जलता है पंजाब’ सुनकर राजकपूर ने उन्हें आरके आने का निमंत्रण दिया, मगर फिल्मों में आने से शैलेंद्र ने मना कर दिया, लेकिन पत्नी की गर्भावस्था की मजबूरीवश वे आरके से जुड़ गए.

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