छत्तीसगढ़

महानदी के बाढ को ग्रामीणों ने अभिशाप से बना लिया वरदान |


दुनिया में बाढ़ की समस्या बहुत आम है हर साल हमे देश के किसी न किसी कोने में बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता है। और ये समस्या ऐसी है जिसका असर सालो तक उस क्षेत्र में देखने को मिलता है। एक ऐसा ही स्थान है छ्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम सूरजगढ़। इस गांव के नजदीक से ही महानदी गुजरती है जो यहाँ के लोगो के लिए अभिशाप और वरदान दोनों है। बरसात के मौसम में जंहा इस नदी का पानी यहाँ के लोगो के बन कर टूटती है इसी का पानी इनके लिए वरदान साबित होता है।

यहाँ के लगो की खास बात यह है की गांववाले महानदी के बीच में बने टापू पर बीते कई सालों से खेती कर हजारों से लाखों रुपए की कमाई कर रहे है। रायगढ़ जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर महानदी के किनारे बसे गांव सूरजगढ़ की जनसंख्या करीब 400 के आसपास है। बाद के दौरान यहाँ के लोगो को जिला प्रशासन के द्वारा गांव को पूरी तरह से खाली करवाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया जाता है। इस दौरान ग्रामवासियो को कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है।

बाद की वजह से यहाँ का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है जिसलकी वजह से आवाजाही पंड पद जाती है जिसकी वजह से उन्हें आवश्यक वस्तुए भी नहीं मिल पती। इलाज मिलना पाना तक मुश्किल हो जाता है। इमरजेंसी में लोगों का अस्पताल या दूसरी जगह पहुंचना मुश्किल हो जाता है। लेकिन महानदी का पानी उतरते ही यही नदी उनके लिए वरदान बन जाती है। ग्रामवासियो के पास उनका खुद का जमींन नहीं है।

गांव के अधिकांश किसान नाव के सहारे महानदी के बीच बने टापू पर पहुंचकर खेती करना पसंद करते हैं। बाढ़ की वजह से यहाँ की मिटटी काफी उपजाऊ हो जाती है इस लिए जायदातर किसान यहाँ खेती करना पसंद करते है। और कम लागत में किसानों को अपनी फसल से अच्छा-खासा मुनाफा भी मिल जाता है। किसानो के द्वारा यहाँ बैंगन, ग्वारफली, बरबट्टी, झुनगा, मखना, करेला, हरी मिर्च के अलावा अन्य हरी सब्जियां उगाए जाते हैं जिससे किसानो को अच्छा मुनाफा मिलता है। गर्मी के दिनों में यह खरबूज, ककड़ी, खीरा और तरबूज की खेती भी की जाती है। गांव के किसानों के मुताबिक, प्रति किसान यहां से 55 से 60 हजार रुपये की आमदनी कमाता है।



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