सरगुजा- तारीख पर तारीख बदल देते हैं, वक्त पर निपटान नहीं होता मामलों का साहब – cgtop36.com

मुन्ना पांडेय लखनपुर- तहसील कार्यालय में लम्बीत मामलों का समय सीमा के अंदर निपटान नहीं होने से पक्षकारों में असंतोष व्याप्त है । आवेदनों के सुनवाई में महिनों नहीं सालों लग जाते हैं साहब! तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ये कथन है एक आवेदक का जो तहसील कार्यालय का चक्कर लगाते परेशान है।
सही मायने में कार्यालय में बैठे शाखा लिपिक तारीख बदल कर पक्षकारों को दूसरी तारीख में हाजरी देने की मशवरा देते हुए चढोतरी लेकर बाहर का रास्ता दिखा देते है। कुछ आवेदकों ने बताया कि अक्सर तहसीलदारो के शासकीय कार्य से उलझे होने तथा अन्यत्र कहीं चले जाने व कार्यालय में नहीं रहने कारण भी फाईल दबे रहते हैं लम्बित प्रकरणों के फाईल खुल नहीं पाते आवेदकों का काम समय पर नहीं हो पाता पिछली प्रकरणों का निपटारा हो नहीं पाता और नये प्रकरण फाईलों का अंबार लग जाता है प्रकरणों के निपटान नहीं होने से आवेदकों में मायूसी रहती है कोई दूसरा विकल्प भी नहीं होता। पक्षकारों को दिन भर तहसील कार्यालय में बैठने के बाद बैरंग वापस घर लौट जाना पड़ता है दूर ग्रामीण अंचलों से आने वाले पक्षकारों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।
कुछ आवेदकों ने बताया कि सीमाकन अविवादित नामांतरण बंटवारा फौती दर्ज कराने रिकार्ड त्रुटि सुधार ऋण पुस्तिका बनवाने जैसे अन्य छोटे राजस्व मामलों के लिए हफ्तों नहीं महीनों ,साल कार्यालय का चक्कर लगाने पढ़ते है। शायद शासन आमजनों के हित में तहसील न्यायलय को अस्तित्व में लाया परन्तु तहसील कार्यालय में जैसा होना चाहिए वैसा नहीं हो रहा है दलाल और शाखा लिपिक मिलकर अनजान आवेदकों को काम कराने के झांसे में रख कर अनाप-शनाप फिस की उगाही करते हैं।
दलालों के काम आसानी से हो जाते हैं इन शिकायतों से तंग आवेदकों ने तहसील कार्यालय में व्ययवस्था सुधार कराने की मांग शासन प्रशासन से किया है ।




