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आपातकाल आलेख – आपातकाल मे लोगों का विरोध काफी अहम था

पच्चीस जून सन उननीस सौ सततर मे शाम सात बजे गांधी चौक मैदान मे स्व. मधु लिमये जी की सभा थी ।  विशेषकर तत्कालीन भारतीय जनसंघ पार्टी और इन समाजवादी पार्टी मे ही ओजस्वी वक्ता रहते थे। इनके भाषण देश की समस्याओं का पूरा खाका ही खींच देते थे ।  इसलिए मै कभी भी इन लोगों के भाषण सुनने से अपने को रोक नहीं पाता था।  स्व. मधु लिमये जी को छत्तीसगढ़ से बहुत लगाव था।  क्योकि यहां पार्टी बहुत अच्छी तो नहीं कही जा सकती पर ठीक-ठाक हालात मे थी । वैसे मै इस विचारधारा का तो नहीं था पर मेरा मित्र आईएएस अधिकारी रहे स्व.  अब्दुल जब्बार ढांकवाला जो हम लोग अलग-अलग स्कूल के छात्र थे पर डिबेट के कारण अच्छी दोस्ती हो गई थी ।  अब्दुल हमेशा तत्कालीन समाजवादी नेता स्व.गणपत लाल साव के यहां आजाद चौक मे उनकी छोटी सी दुकान रहा करतीं थी मेरे को लेकर बहुत जाया करता था। पुनः विषय पर आऊं स्व. मधु लिमये जी जहां इस देश के बहुत अच्छे नेता प्रखर वक्ता विपक्ष के सजग सांसदो मे इनकी गिनती होती थी।  उनका छत्तीसगढ़ से लगाव दो कारणों से था पहला उनका छत्तीसगढ़ के समाजवादी नेता स्व. पुरुषोत्तम लाल कौशिक जी से जो महासमुंद से विधायक थे जिन्होंने राइस किंग सेठ स्व. नेमीचंद जी श्री माल को हराया था जो अपने मे बहुत बड़ी बात थी ।  उनसे उनके काफी अच्छे संबंध थे यही कारण था कि स्व. कौशिक पहले सांसद फिर केंद्रीय मंत्री भी बने ।  दूसरा कारण छत्तीसगढ़ के स्तर मे भी प्रभावशाली लोग नेता यहां पर अपनी मौजूदगी का भी अहसास कराते थे ।  एक और समाजवादी नेता का भी उल्लेख करूंगा जिन्होने तत्कालीन मध्यप्रदेश में रायपुर को ही पूरे देश मे चर्चा मे लाकर खड़ा कर दिया था ।  वो कोई और नहीं अधिवक्ता  स्व. कमलनारायण शर्मा जी थे ।  जिन्होंने अगर मै गलत न हू तो शायद सन सडसठ मे तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.  द्वारका प्रसाद मिश्र के खिलाफ कसडोल विधानसभा से चुनाव लडा था और हारने के बाद उसे हाईकोर्ट जबलपुर मे चुनौती देकर निरस्त कर पूरे देश मे ही तहलका सा लाकर खड़ा कर दिया था । अंत मे स्व. द्वारका प्रसाद मिश्र जी को अपने पद से इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा था।  मै लिखते लिखते कुछ अतीत मे चला गया था।  मै भी अपने सायकल से गांधी चौक पहुंच गया था वहां पर सभा के निरस्त होने की सूचना प्रशासन द्वारा दी जा रही थी । भीड़ को अपने अपने घर जाने की गुंजारिश की जा रही थी लोगों के पास कुछ सूचना भी नहीं थी । अंत मे प्रशासन के कहने पर लोगों को अपने घर का रूख करना पड़ा।  दूसरे दिन पता चला कि मधु लिमये जी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इस संगठन कर्ता को यह अहसास था कि यहां पर इस विचारधारा के लिए बहुत जगह है और भविष्य में यह कांग्रेस का विकल्प भी बन सकती है । पर दुर्भाग्य से राजनीति मे यह सफल नहीं हो पाया ।  धर्मनिरपेक्षता के चलते यह कब समाजवादी से कांग्रेस के नेता कब बने पता भी नहीं चला । कुछ लोग सिद्धांत के साथ बने रहे अपने अस्तित्व के लिए लडते रहे कार्यकर्ताओ की कमी फिर सबसे बड़ा संसाधनों की कमी ने छत्तीसगढ़ मे इनके विकल्प की संभावनाओ को ही खत्म कर दिया।  नहीं तो यह ही छत्तीसगढ़ था जहां से तत्कालीन प्रथमं  विपक्षी नेता  का सौभाग्य स्व. प्यारेलाल सिंह जी ठाकुर जी को मिला था । फिर उनके बाद उनके पुत्र स्व. ठाकुर रामकृष्ण सिंह जी भी विधायक बने थे । आज मै आपातकाल पर लिखते लिखते समाजवाद पर भी कुछ लिख दिया  ।  जब उस समय के समाजवादी नेताओं का उल्लेख कर ही रहा हू तो महासमुंद के एक और प्रभावशाली नेता रहे विधायक भी रहे स्व. जीवन लाल साव का बहुत बड़ा योगदान रहा है  ।  स्व. एच वी नारवानी हर छोटी बड़ी सभा में उनके भाषण याद है।  फिर  श्री रमेश वरलयानी जी भी जनता पार्टी की ओर से विधायक बने बाद मे कांग्रेस मे आए ।  पर आपातकाल मे इन लोगों का विरोध काफी अहम था यही कारण है कि स्व. जार्ज फर्नांडीज जैसे नेता को तो हथकडी डालकर जेल ले जाया गया था  ।   यहां भी सभी छोटे बड़े सभी नेताओं को आपातकाल मे जेल ले जाया गया था।   कभी आगे मै तत्कालीन जनसंघ पर चर्चा करूंगा।  बस इतना ही
डा.  चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

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