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9वी शताब्दी में बना ऐतिहासिक धरोहर का अदभुत शिव मन्दिर कार्तिक पूर्णिमा में भरता है यहां मेला

पलारी।कार्तिक पूर्णिमा पर नगर पलारी के विशाल बालसमुंद तट पुन्नी मेला शुक्रवार 19 नवम्बर को लगेगा क्षेत्र में मड़ई मेले की शुरुआत इसी मेले से होती है।मध्य रात्रि से ही भारी संख्या में श्रद्धालु विशाल बाल समुँद तालाब मे पुन्नी स्नान कर दीप दान करते हैं लोग मेले का आनँद उठाते हैं

वही समीप के गाँव लकड़िया के यादव समाज पारम्परिक रावत नाच का आयोजन करते हैं ।मालूम हो गया कि बालसमुंद तालाब तट पर स्थित सिध्देश्वर मँदिर प्राचिनतम मँदिरो मे से एक है,छत्तीसगढ़ क्षेत्र में लाल ईँटो के मँदिरो की गौरवशाली परम्परा रही है

इसी परम्परा का उत्कृष्ट उदाहरण हैं यह पश्चिमाभिमुख शिव मंदिर लघु अधिष्ठान पर निर्मित है मँदिर का गर्भ गृह पँचस्थ शैली का है तथा जँघा तक अपने मुल रुप मे सुरक्षित है कला की दृष्टी से यह मँदिर 900 ईस्वी का प्रतित होता है जो भारत के धरोहर सिरपुर के लक्ष्मण मँदिर के समकक्ष है

इस मँदिर के मुख्य द्वार पर पाषाण निर्मित चौखट अत्यंत कलात्मक एवं अलँकृत है जिस पर शिव विवाह का सुन्दर चित्रण अँकित है इसके दोनो पाश्रवो मे गँगा व यमुना नदी का त्रिभँग मुद्रा मे अँकन है मँदिर मे ही ब्रम्हा, विष्णु, अर्ध्यनारेश्वर,सूर्यनारायण, नृसिंह भगवान, हनुमान,सरस्वती सहित अनेको देवी देवताओं के मनोमुग्धकारी कलात्मक चित्रण किया गया है

जो धीरे क्षरण होते जा रहा है मँदिर के समीप ही विशाल पीपल पेड़ के निचे भगवान सिद्ध बाबा विराजित ऐसी मान्यता है कि जो भी मन मनोकामना करते है उनकी मनोकामना पूरी होती है इसी कारण यह मँदिर सिध्देश्वर के नाम से विख्यात है।वर्तमान में यह स्थल पुरातात्विक विभाग के अधीन है,मँदिर क्षेत्र ही दुर्गा मँदिर, हनुमान मंदिर, राधाकृष्ण मँदिर, गुरु घासीदास मँदिर की एक श्रृँखला है।

मँदिर के सामने लगभग 130 एकड़ मे फैला बालसमुंद तालाब प्रदेश के शान को झलकाता है किवदँती है कि इस तालाब खुदाई की छैमासी रात मे किया गया बताया जाता है कि घुमँतू जाति के नायको का दल यहां आकर बस गए वे पानी नही होने से परेशान हो गए तब नायको ने तालाब की खुदाई की खुदाई के बाद भी तालाब सुखा का सुखा रहा तब गुरूजनो के सलाह से नवजात शिशु को परात मे रखकर छोड़ा गया और देखते ही देखते तालाब लबालब हो गया और बालक भी सुरक्षित ऊपर आ गया ।

विशाल तालाब और लहराते हुए जल मे मँदिर का प्रतिबिँब देखते ही बनता है, प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा मे विशाल मेला का आयोजन होता है जिसमे दुर दराज के हजारो की सँख्या मे दर्शनार्थी सुख, शाँती व समृध्दि की कामना करने यहां आते हैं।

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