विशेष लेख संडे की चकल्लस – नए स्वाद का संदेश, रायपुर का मंजू ममता रेस्टोरेंट – अजय वर्मा

मुगल सम्राट बाबर जब पहली बार भारत आए तो यह जानकर हैरान रह गए कि भारत की सड़कों पर रोटी नहीं बिकती। वैसा ही कोई शख्स सौ साल पहले रायपुर आता तो कहता कि रायपुर की सड़कों पर भोजन तो क्या नाश्ता तक नहीं मिलता है। जी हां रायपुर में होटलों का इतिहास सौ साल पुराना भी नहीं है। पुराने लोग बताते हैं कि शुरुआती दौर में नाश्ते की होटलों की शुरुआत भजिया, गुलगुला भजिया और बड़े से हुई थी। इसके बाद पोहा चना, फिर समोसा, कचौरी और भेल जैसी चीजें आई। समय के साथ नाश्ते की चीजों में थोड़ा बहुत बदलाव के साथ कुछ नई चीजें जुड़ती गईं।
ऐसे ही बदलाव या कहें नए जमाने का संदेश लेकर आई शारदा चौक के पास स्थित मंजू ममता रेस्टोरेंट । रायपुर आज छत्तीसगढ़ की राजधानी बन कर महानगर का रूप ले चुका है। यहां अब एक से एक रेस्टोरेंट और होटल खुल चुके हैं। किंतु सत्तर की दशक में छोटे से शहर रायपुर जिसकी आबादी महज एक लाख भी नहीं रही होगी, तब नाश्ते और खाने की होटल ज्यादातर टपरी नुमा हुआ करते थे। ऐसे समय में 3 फरवरी 1977 को यहां मंजू ममता नाम का सर्व सुविधायुक्त और नए तरह का जायका वाला होटल खुला। होटल के संचालक रविंदर सिंह दत्ता विंकी बताते हैं कि उनके होटल की शुरुआत में डोसा, सांभर बड़ा, इडली, छोले भटूरे, समोसा, कचौरी,लस्सी और चाय कॉफी जैसे आयटम परोसे जाते थे। समय के साथ ही कोल्ड कॉफी, मिल्क शेक, चाट, गुपचुप, चाइनीज आइटम, पाव भाजी और पिज्जा बर्गर भी जुड़ते गए।
वे बताते हैं कि उनके पूर्वज वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के निवासी थे।
साल 1910 के आसपास वे हरियाणा के सलीमपुर गांव में आकर बस गए थे। उनके दादा अवतार सिंह दत्ता तत्कालीन ब्रिटिश रेलवे में साल 1932 में मुलाजिम हो गए थे। उनकी पहली पोस्टिंग खड़कपुर में हुई थी। खड़कपुर से स्थानांतरित होकर झारसुगुड़ा फिर रायपुर आए और रायपुर में ही आकर बस गए।उ न्हीं के पुत्र राजेंदर सिंह दत्ता ने मंजू ममता रेस्टोरेंट की शुरुआत की।
इस रेस्टोरेंट के खुलने की भी दिलचस्प कहानी है। रायपुर से 115 किमी दूर बिलासपुर में आज भी पेंड्रा वाला नामक एक पुरानी होटल मौजूद है। उस होटल के मालिक के एक पुत्र रूपनारायण अग्रवाल ने रायपुर आकर वर्तमान पुराना बस स्टैंड के पास साल 1971 में एक होटल खोली। होटल का नाम रखा मधु स्वीट्स। उन्ही के मदद से राजेंदर सिंह दत्ता ने अपना रेस्टोरेंट मंजू ममता खोला। उनके बेटे रविंदर सिंह दत्ता विंकी बताते हैं कि उनकी माँ बिलासपुर की थी। वहीं से अग्रवाल परिवार से परिचय था। इस वजह से अग्रवाल परिवार रिश्ते में उनके मामा परिवार हैं। रूपनारायण अग्रवाल की बड़ी बेटी का नाम मधु है। जिनके नाम से मधु स्वीट्स है। उन्हीं की दो छोटी बेटियों के नाम से मंजू ममता रेस्टोरेंट नाम रखा गया। रायपुर में भी दोनों परिवार पास पास में ही निवासरत है। इस होटल को खोलने में एक और बड़ी मदद सेठ लक्ष्मी नारायण नत्थानी ने भी की थी।
(इस लेेेख के लेखके अजय कुमार वर्मा हैं जो पेेेशे से शासकीय सेवक हैैं)




