वरिष्ठ विधायक रामविचार नेताम आज लेंगे प्रोटेम स्पीकर की शपथ, क्या होता है प्रोटेम स्पीकर, क्या होती है शक्तियां और इनके कार्य, यहां जानें

राज्यपाल हरिचंदन दिल्ली से लौट आए हैं। और वे वरिष्ठ विधायक रामविचार नेताम को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त कर दिया है। उन्हें आज सुबह 10.30 बजे राजभवन में शपथ दिलाएंगे। इस मौके पर सीएम विष्णु देव साय और दोनों डिप्टी सीएम, अन्य विधायक मौजूद रहेंगे। और फिर वे मंगलवार को सदन में नवनिर्वाचित विधायकों की सदस्यता की शपथ दिलाएंगे।
सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल विस सत्र की अधिसूचना आज जारी करेंगे। सत्र 19-21 दिसंबर तक होगा। सत्र मेंन अध्यक्ष का चुनाव, राज्यपाल का अभिभाषण और अनुपूरक बजट पारित होगा। इसके बाद सदन अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जाएगा । सालाना बजट के लिए फरवरी-मार्च सत्र नए सिरे से आहूत किया जाएगा।
क्या होता है प्रोटेम स्पीकर का पद –
आपको बता दें कि प्रोटेम स्पीकर का काम नए सदस्यों को शपथ दिलाना और स्पीकर (विधानसभा अध्यक्ष ) का चुनाव कराना होता है. अब आप लोगों में से कई लोगों को थोड़ा सा कनफ्यूजन होगा कि प्रोटेम स्पीकर कौन होता है? विधानसभा अध्यक्ष को वो क्यों चुनेगा? तो आप यहां जानिए पुरा प्रोटेम स्पीकर का कार्य
प्रोटेम स्पीकर क्या होता है?
प्रोटेम (Pro-tem) लैटिन शब्द प्रो टैम्पोर(Pro Tempore) का संक्षिप्त रूप है. इसका शाब्दिक अर्थ होता है-‘कुछ समय के लिए’. प्रोटेम स्पीकर कुछ समय के लिए राज्यसभा और विधानसभा में काम करता है. प्रोटेम स्पीकर वह व्यक्ति होता है जो विधानसभा और लोकसभा के स्पीकर के पद पर कुछ समय के लिए कार्य करता है. यह अस्थायी होता है. प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति गवर्नर करता है. आमतौर पर इसकी नियुक्ति तब तक के लिए होती है, जब तक स्थायी विधानसभा अध्यक्ष ना चुन लिया जाए. प्रोटेम स्पीकर ही नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ दिलाता है. शपथ ग्रहण का पूरा कार्यक्रम प्रोटेम स्पीकर की देखरेख में होता है.
प्रोटेम स्पीकर के कार्य
- नए सदस्यों को शपथ दिलाना.
- विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव कराना.
- फ्लोर टेस्ट करने का काम करना.
- स्थायी स्पीकर चुने जाने तक सदन की गतिविधियों को चलाना.
- सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने का कार्य.
प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति
प्रोटेम स्पीकर के पद पर सदन के वरिष्ठ सदस्य को चुना जाता है. जो सदन में नए एवं स्थायी स्पीकर का चुनाव करने में सहायता करता है. प्रोटेम स्पीकर उसे ही बनाया जाता है, जो कई बार विधानसभा चुनाव जीत चुका हो. भारत के संविधान के अनुच्छेद 180 के तहत राज्यपाल के पास सदन का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने की शक्ति होती है. जब सदन नए स्पीकर का चुनाव करता है, तो प्रोटेम स्पीकर का पद मौजूद नहीं रहता है. इसलिए प्रोटेम स्पीकर का पद अस्थायी है, जो कुछ दिनों के लिए ही अस्तित्व में रहता है.




