आलेख- छत्तीसगढ के अनेक जगह है जो इकहत्तर के युद्ध के समय के बने शरणार्थी आज हमारे यहां भारतीय नागरिक बनकर रह रहे – cgtop36.com

डा. वाघ की वाल मे आज अपनी बात पर बांग्लादेश की बात करूंगा । बांग्लादेश मे कुछ सालो से हिंदूओ का पलायन व मंदिरो पर हमले अब आम बात हो गई है । इसलिए भारत सरकार ने विदेशो मे बसे हिंदूओ के लिए जो बिल लाया था उसमे बांग्लादेश भी शामिल है जहां हमारे हिंदू भाई सुरक्षित नही है । यह वह देश है जो सिर्फ पचास साल पहले का ही यह लोग अपना इतिहास भूल गए। आज भी माना कैंप व छत्तीसगढ के अनेक जगह है जो इकहत्तर के युद्ध के समय के बने शरणार्थी आज हमारे यहां भारतीय नागरिक बनकर रह रहे है । मुजीबर रहमान लोकतंत्र के जरिए निर्वाचित होने के बाद सत्ता से पाक हुकमरानो ने उन्हे बेदखल कर दिया और उन्हे जेल मे भी बंद कर दिया । आज अगर बांग्लादेश अपना अस्तित्व देख रहा है तो वह सिर्फ भारत के कारण ही संभव हो पाया है । हम लोगो को तो बेवजह ही इस युद्ध मे भाग लेना पडा । जहां हमारे जवान शहीद हुए वही बेवजह बडे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। मुझे अच्छे से याद है उस समय हम बांग्लादेश के नाम से टैक्स भी दिया करते थे । यह पडोसी होने का धर्म था । पर क्या बांग्लादेश ने अपने मित्र होने का फर्ज निभाया । कुछ सालो लोकतंत्र मे आने के बाद यह लोग भी अपने मूल स्वभाव मे आ गए फिर क्या था धर्मनिरपेक्ष बांग्लादेश इस्लामिक देश के नाम से जाने लगा । अगर इस्लामिक देश मे ही रहना था तो पाकिस्तान भी तो इस्लामिक देश था साथ रह लेते । बस क्या इस्लामिक देश बनने के बाद यह लोग भी अपने पिता पाकिस्तान की राह पर चलने लगा । एक झटके मे इस देश व लोगो के उस सहयोग को भूल गया जो उन्हे बांग्लादेश बनने के समय मिली थी । फिर तो यह अल्पसंख्यक समुदाय हिंदू उनके आंखो मे चुभने लगे फिर वही ढर्रे पर वहां की अवाम चलने लगी । हिंदूओ का पलायन ही इनका मकसद था दूसरी तरफ हमारे यहां के मक्कार नेताओ व जयचंद ने वहां के नागरिको को अपनी राजनीतिक फायदे के लिए यहां की नागरिकता प्रदान करने का षडयंत्र भी किया है । यही कारण है की आज पश्चिम बंगाल संवेदनशील हो गया है । अब हमे बांग्लादेश के लेकर जो विदेश नीति पर फिर से विचार करने की आवश्यकता जहां की भारत को अपना दुश्मन समझे बस हमे भी सिर्फ औपचारिकता वाली ही मित्रता रखनी चाहिए । वहां के लोग यहां आकर इलाज कराये आईपीएल मे पैसा कमाने का काम करे इस पर पाकिस्तान के जैसे बंदिश लगनी चाहिए। आप हमारे लोगो को नुकसान पहुचाओ और हमसे ही पैसे कमाओ । क्या हालत हो गई है पाक कलाकारो और खिलाडियो की बस यही इनके साथ होना चाहिए। बहुत हो गई मानवता मानवीयता सद्भावना यह सब कूढे के ढेर मे सजाने के लिए यह शब्द बने है अब सिर्फ जैसे को तैसा वाली नीति अपनानी चाहिए। वही इजराइल से पूरे बार्डर को सुरक्षित कैसे रखा जाना है इस तकनीकी पर काम करने की आवश्यकता है । उस पर हर भारतीय को यह मलाल तो रहेगा ही की बांग्लादेश आप भी वैसे ही निकले ।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




