आखिर नथ उतरवाई में क्या करते थे नवाब, कैसे बनाई जाती थी तवायफ

संजय लीला भंसाली ने लगातार पीरियड ड्रामा कहानियों को पर्दे पर दिखाया है, बॉलीवुड में शायद ही कोई फिल्म निर्माता उस स्तर तक पहुंच सकता है. और इस बात की पुष्टि उनके पहले ओटीटी शो ‘हीरामंडी’ के ट्रेलर से एक बार फिर हो गई है. हीरामंडी’ को जिस तरह से फिल्माया गया है, उसका हर एक सीन आपको रोमांचित कर सकता है. हीरामंडी में तवायफ कैसे बना जाता है ये भी दिखाया गया है, जिसको नथ उतराई कहा गया है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर इसमें क्या होता था और तवायफों की नथ उतराई में नवाब क्या करते थे?
क्या है नथ उतराई?
हीरामंडी में हमने देखा कि यहां पर तवायफों का राज चलता है, एक बड़ी रानी से लेकर छोटी लड़कियां यहां पर रहती हैं. हीरामंडी में तवायफ बनने के कई नियम होते हैं, जिनको पूरा करने के बाद ही एक लड़की तवायफ के तौर पर पेश किया जाता है. इस पूरी सीरीज में एक बात का बहुत जिक्र हुआ है, वो है नथ उतराई. मल्लिकाजान अपनी बेटी आलमज़ेब को पूरी सीरीज में नथ उतराई के लिए राजी करती नजर आई हैं. आसान शब्दों में समझें तो ये एक ऐसा प्रोग्राम है जिसमें एक कुंवारी लड़की का मुजरा होता है.
नथ उतराई में नवाबों का काम है?
जिस तरह से सीरीज में दिखाया गया है कि पूरे हीरामंडी में नवाबों का आना जाना लगा रहता है. कहा जा सकता है कि हीरामंडी की रोजी रोटी इन्हीं नवाबों से चलती है. जिस नथ उतराई की हम बात कर रहे हैं उसमें नवाबों का भी काफी अहम रोल है. सीरीज के मुताबिक, जब तक किसी लड़की की नथ उतराई नहीं हो जाती वो किसी नवाब के पास नहीं जाती है. इसीलिए तवायफ बनने के लिए इस रस्म का होना बहुत जरूरी होता है, जिसमें तमाम नवाब शामिल होते हैं.
आमतौर पर जिस तरह से शादी का आयोजन किया जाता है, उसी धूमधाम के साथ तवायफों के लिए नथ उतराई का प्रोग्राम रखा जाता है. इस प्रोग्राम में शहर के तमाम नवाब आते हैं, क्योंकि इस दिन के बाद से हीरामंडी की तवायफों में एक नई तवायफ का नाम जुड़ जाता है. इस दौरान लड़की को पहले मुजरे के लिए दुल्हन की तरह सजाया जाता है. इस दौरान तमाम नवाब यहां पर मौजूद होते हैं. इन्हीं नबावों में से कोई एक नवाब उस नई तवायफ का साहब बनता है. इसलिए सभी नवाबों के लिए ये पहला मुजरा बहुत खास होता है.




