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विशेष लेख – पुरस्कार सम्मान की महत्ता वही जानता है जो योग्य हो और उसे न मिले

पुरस्कार सम्मान की महत्ता क्या होती है । जो योग्य है पर उसे किसी राजनीतिक वरद हस्त न मिलने से वो उससे महरूम रहता है वो ही जानता है । पर जिन लोग अयोग्य होते है उनके लिए यह पुरस्कार तो तीतर के हाथ बटेर से ज्यादा कुछ नहीं रहता है। अभी तक एवार्ड वापसी का ही नाटक इस देश ने देखा। यह एवार्ड वापसी ने तो काफी सुर्खियां भी बटोरी । पर एक भी बंदा नहीं निकला जिसने एवार्ड वापसी की हो और जो उसके साथ जो रकम मिली उसे मय ब्याज लौटाने की हिम्मत की हो । कुछ नहीं यह अपने पुराने आकाओ के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का एक प्रयास से ज्यादा कुछ नहीं था । बस शासन के विरोध का मीडिया के ध्यान आकर्षित करने से ज्यादा कुछ नहीं था । पर देश ने जनता ने यह सब नाटक समझ लिया। इसलिए इन्हे वो सफलता भी नहीं मिल पाई । अब पद्म पुरस्कार लौटाने का दुःसाहस किया जा रहा है। देश के राष्ट्रीय पुरस्कार जिस पर देश का मान सम्मान निर्भर है। इस राष्ट्रीय पुरस्कार को भी कोई कैसे लौटाने की सोच सकता है ? यहां तो वापस लौटाने की बात हो रही हैं। वैसे भी किसी भी नेताओं को इस तरह के सम्मान से दूर ही रखना चाहिए। जब इनका राजनीतिक गठबंधन रहता है तो इनके लिए शासन की हर बात अनुकूल लगती है। पर जब इनका राजनीतिक विरोध होता है तो विरोध भी मै किसी भी हद तक जाने को यह लोग गलत नहीं मानते । यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। पर इसमे जब पद्म सम्मान लौटाने की बात करते है तो ऐसे लगने लगता है कि इनमे राजनीतिक सूझ बूझ का नितांत अभाव है। आपका नीति से विरोध है तो नीतिगत विरोध करना चाहिए। जब सम्मान लौटाने की बात करते है तो राजनीतिक दिवालियेपन से ज्यादा नहीं लगता । पर यह लौटाने वाले महानुभावों ने कभी भी सोचा है कि इसका असर कितना पडता है। जिन लोगों को अपने क्षेत्र मे सतत् काम करने के कारण सम्मानित किया गया उन लोगों के लिए भी इस तरह के समाचार मानसिक कष्ट देते है । वहीं इस तरह से पुरस्कार लौटाने की बात करना उनके भी सम्मान को कम करता है। अब तो सम्मान को राजनीति से परे रखना चाहिए। सरकार किसी की भी हो नीति गत मुद्दे के मतभेद को लेकर कम से कम इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। अगर आपको राजनीति करनी है और नीति गत मतभेद के मुद्दे को लेकर पुरस्कार और सम्मान से ज्यादा महत्व इसका है ऐसे लोगों को सम्मान लेने से बचना चाहिए। अब इन सम्मानों पर भी नई गाइड लाइन जारी करने की आवश्यकता है कि। जो भी बंदा ऐसे राष्ट्रीय पुरस्कार को लौटायेगा उस पर एफआईआर दर्ज कर गैर जमानती वारंट जारी कर तुरंत अंदर कर कम से कम दस वर्ष का सश्रम कारावास की सजा दी जानी चाहिए। वहीं उसके राजनीतिक गतिविधियों पर भी ताउम्र पाबंदी लगा दी जानी चाहिए। फिर न एवार्ड वापसी वाले दिखेंगे । कोई भी कितना ही राजनीतिक रूप से सक्षम हो ऐसे कानून के बनने से इसके सामने अपने को कमजोर महसूस करेंगे। फिर इसके राजनीतिक महत्वाकांक्षा व दुरूपयोग दोनों बंद हो जाऐंगे। इन लोगों ने लचर कानून के चलते मजाक बनाया हुआ है। इससे देश की छबि को काफी नुकसान पहुंचता है। वैसे भी इनका मकसद यही रहता है। शायद अब सरकार को इस तरह के कंडे कानून बना कर इनके राजनीतिक एजेंडा पर लगाम कहने की आवश्यकता है। लोकतंत्र का मतलब कतई यह नहीं कि जब चाहे आपको पगड़ी उछालने का अधिकार मिल गया है। सरकार से अनुरोध है कि इस पर विचार करे । वहीं इसके बाद कितने लोग होंगे जो लोकतंत्र के नीतियों के विरोध में सम्मान लौटाने की हिम्मत करेंगे। बस इतना ही डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

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