आखिर चाँद दिखाई देने के बाद क्यूँ मनाई जाती है ईद, जानिए यहां
कल शाम को चांद के दीदार के साथ ईद (Eid-Ul-Fitr 2020) का जश्न शुरू हो गया है। सभी को इस चांद का बेसब्री से इंतज़ार था। चांद दिखने के बाद सभी लोग एक- दूसरे को ईद की मुबारकबाद दे रहें हैं और ईद मना रहें हैं।
आपको बता दें कि इस्लाम के नौंवे महीने रमजान के बाद 10वें शव्वाल की पहली तारीख को चांद देखने के बाद ईद मनाई जाती है। साल में दो बार ईद का पर्व मनाया जाता है, पहली ईद को ‘मीठी ईद’, एवं दूसरी को ‘ईद उल जुहा’ यानी ‘बकरीद’ कहते हैं।
इस्लाम के अनुसार, पैगंबर मोहम्मद साहब द्वारा ‘जंग ए बदर’ में जीत दर्ज करने के बाद से ही ईद मनाने की शुरुआत हुई। माना जाता है कि 624 ईस्वी में पहली बार ‘ईद- उल-फितर’ मनाई गई थी। वहीं रमजान का पाक महीना इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस महीने ही इस्लाम धर्म की किताब ‘कुरआन-ए- शरीफ’ आसमान से उतरी थी। इस बार चाँद के दीदार के बाद ‘ईद- उल-फितर’ 25 मई को मनाई जा रही है।
गौरतलब है कि इस्लाम में रमजान और ईद का जश्न चांद दिखने के साथ होता है। जिस तरह रमजान का चांद दिखने के साथ इस पाक महीने की शुरुआत होती है, उसी तरह आखिरी रोजे के दिन ईद का चांद दिखने के साथ रमजान का पाक महीना खत्म हो जाता है और ईद का बड़ा त्यौहार मनाया जाता है।
कल शाम को रोजा खुलने के बाद भारत समेत कई देशों में ईद का चांद नजर आ गया उसके बाद सभी लोग इस मुबारक चांद को देखने के बाद एक- दूसरे को ईद की मुबारकबाद दे रहें हैं।



