
किसानों को समर्थन मूल्य में धान बेचने के 1 माह बाद भी अभी भी किसान जिला सह बैंक पलारी के चक्कर लगा रहे है ।ऐसे सेकड़ो किसान है जो 10 दिसंबर को समर्थन मूल्य में धान बेचे है जिनके खाते में अभी तक भुगतान की राशि नही आई है।जिम्मेदार अधिकारी भी स्पस्ट जवाब नही दे पा रहे है कभी वो तकनीकी खामी बताते है तो कभी भुगतान की राशि मुम्बई में सॉफ्टवेयर की प्रॉब्लम बता कर अपना पल्ला झाड़ रहे है। इस सब के बीच किसान कर्ज एवम घर खर्च के लिए दुकानदारों से कर्ज लेकर अपना काम चला रहे है। किसान धान बेचने के बाद भुगतान के लिए समिति और बैंक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। माह भर से अधिक समय बीत चुका है लेकिन किसानों के खाते में बिक्री रकम अब तक नही पहुंची है।
किसानों और समितियों के मुताबिक जिले में विगत आठ, नौ 10 दिसंबर को धान बेचने वाले किसानों में से अधिकांश किसानों के खाते में बिक्री रकम अब तक नहीं पहुंच पाई है। इसकी वजह से किसान भुगतान की जानकारी के लिए समिति और बैंक के चक्कर काट रहे हैं। इधर, समिति भी किसानों को कोई जवाब नहीं दे पा रही है जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। समिति भी यही बता रही है कि उक्त तिथियों में धान बेचने वाले अधिकांश किसानों के खाते में राशि नहीं पहुंची है। इसके लिए वे उनके पास पहुंच रहे हैं। बता दें कि भुगतान संबंधी समस्या से किसानों को हर साल जुझना पड़ता है। पलारी के किसान लीलाधर साहू ने बताया कि मैं 60 कट्टा धान बेचा हु, मेरा 4500 रु का बिजली बिल आया है विभाग बार बार लाइन काटने की धमकी दे रहा है। लेकिन धन का भुगतान नही आने से मैं बिल की राशि पटाने में अशमर्थ हु।इसी तरह ग्राम नगपुरा से राजेश बंजारे, पलारी के तिहारु कन्नोजे आदि भी बैंकों में रोज आकर भटक रहे है।




