छत्तीसगढ़

किसानों का धान एक नवंबर से खरीदें सरकार, दीवाली मनाने किसानों के पास पैसो का संकट, किसानों का दीवाली सरकार के हाथ – विष्णु लोधी

डोंगरगढ़ – जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के कार्यकारी जिलाध्यक्ष विष्णु लोधी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि हरूना धान किसानों के खेतों में पककर तैयार हो गई है। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में कटाई-मिंजाई होने लगी है। लेकिन समर्थन मूल्य में धान की खरीदी एक नवंबर से शुरू नहीं हो रही है।सरकार बारदाने का समस्या बताकर दीवाली के पहले धान खरीदी को टाल रही है, ऐसे में किसानों को धान बेचने के लिए इस बार लम्बे समय तक इंतजार करना पड़ेगा। धान नहीं बेच पाने के कारण दीवाली त्योहार मनाने किसानों के पास रुपये नहीं है। अधिकांश किसानों के हाथ खाली है, ऊपर से कोरोना की मार झेल रही किसानों को धान का, दो किस्त नहीं मिला है, ऐसे में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू नहीं होने से जरूरतमंद किसान कोचियों, राइस मिलरों और मंडी में कम दाम पर धान बेचने मजबूर होंगे। मौके का फायदा उठाकर व्यापारी भी कम बोली लगाएंगे। किसान मरता क्या न करता की स्थिति में होंगे। इसलिए मंडी में जो रेट मिलेगा, धान बेचने मजबूर होंगे।

विष्णु लोधी ने कहा राजनांदगांव जिले के किसानों के लिए इस बार की दीवाली निराशाजनक है । सोसाइटी में फिलहाल धान नहीं बेच पाएंगे, इस बार दिवाली 14 नवंबर को है। सरकारी सोसाइटी में धान की खरीदी एक नवंबर से राज्य स्थापना पर छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री अजीत जोगी जी ने शुरू की थी। लेकिन इस बार सरकार की मंशा दीवाली के बाद ख़रीदीं करने की है, ऐसा प्रतीत हो रहा है। लेकिन सरकार चाहे तो 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू कर सकते हैं। कई इलाकों में फसल भी तैयार हो चुकी है, जहां धान की कटाई शुरू हो चुकी है लेकिन सरकारी सोसाइटी के मुंह ताकने मजबूर हो जाएंगे, क्योंकि वहां खरीदी शुरू नहीं हो पाएगी। ऐसे में किसानों को काम चलाने के लिए धान बेचने कोचियों की शरण में जाना पड़ेगा। कई किसान जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत है, धान की कटाई मिंजाई करके दीवाली के पहले, औने – पौने दाम में धान बेचने को मजबूर हो सकते हैं।

विष्णु लोधी ने कहा कि स्थानीय कोचिये ग्यारह सौ से बारह सौ, तो अच्छे धान को अधिकतम 15 सौ प्रति क्विंटल में खरीदने को तैयार हैं, लेकिन यही अगर हम सरकारी सोसाइटी में बेचते हैं तो हमें दो हजार से ज्यादा रुपए तक मिल जाती है। सरकारी खरीदी शुरू नहीं होने से इस बार हमें घाटा उठाना पड़ सकता है। दीवाली में पैसे की जरूरत है इसलिए कोचिये के भरोसे धान बेचकर पैसे जुटाने पड़ेंगे। काम चलाने के लिए कुछ तो बेचना जरूरी है, नही तो बिना पैसे के दीवाली फीकी रहेगी। बच्चों के लिए कपड़े खरीदने पड़ते हैं, ऐसी स्थिति में सरकार को भी चाहिए था कि दीवाली के पहले धान खरीदी शुरू कर देना था, लेकिन सरकार के नियमों पर किसानों का भला कहां से होगा।

धान की फसल तैयार हो चुकी है कटाई शुरू हो चुकी है

विष्णु लोधी ने कहा कि किसानों के धान की फसल तैयार हो चुकी है कटाई भी शुरू हो चुकी है , लेकिन दीवाली मनाने के लिए उनके पास पैसों का संकट खड़ा हुआ है। दीवाली के पहले धान खरीदी शुरू न हो पाने से किसानों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। दीवाली के बाद कई किसान कटाई करना चाह रहे हैं, लेकिन उनके सामने ये भी समस्या है कि कही धान खराब ना हो जाए। क्योंकि उन्हें ज्यादा देर तक सुखाना भी तो खतरे से खाली नहीं होता। इससे उत्पादन पर भी असर पड़ता है।

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