विशेष लेख – कौन संपन्न है यह पता चल जाएगा तो देश मे कितने गरीब है यह भी सामने आएगा – Dr. Wagh

आज डा.वाघ की वाल पर हम गरीब पर ही चर्चा करेंगे । कौन है गरीब इसको परिभाषित करने पर तो सब इस रेखा के नीचे आ जाऐंगे । सबकी अपनी अपनी अलग अलग आवश्यकता है । यह आवश्यकता ही उसे इस रेखा मे लाकर खडा कर देती है । जब कोई यह कहे की मेरी मूवी नही देखोगे तो मेरा बंगला बिक जाएगा ऐसे मे तो यह भी गरीब है । उसे दर्शको की कंगाली है । इससे पूरा बालीवुड गरीबी की रेखा मे आ गया है । अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लडने वाला भी गरीब है । और क्या करे सुरक्षित स्टार गुटका बेचने तक की नौबत आ गई है । लोकतंत्र मे तथाकथित राजपरिवार चलाने वाले भी सड़क मे आ गए है सडको की खाक छान रहे है वह भी गरीब है जो इतनी मेहनत कर रहे है । मेरे को तो उन लोग भी गरीब लगते है जो सत्ता मे रहकर भविष्य को देखकर वसूली कर रहे थे क्या वह इस रेखा मे नही आते ? गरीब आर्थिक ही नही विचार से भी होता है । यह धन पैसा की ही लालसा ही आदमी को गरीब बनाती है । नही तो कौन होगा इसके खातिर जेल जाना चाहेगा । नही तो वो तथाकथित उद्योगपति क्यो इतना फ्राड करते और विदेश भागते वे और उनको सहयोग देने वाले भी गरीब ही थे जिनको यह सब न चाहकर भी करना पडा । आए दिन तनख्वाह बढाने के लिए हडताल सिर्फ पैसो के लिए ही की जाती है । देखा जाए तो हर आदमी गरीब है उसके चाह का कोई अंत नही है रह गया है आवश्यकता उसे कभी संपन्न संतुष्ट होने नही देती । यह मांग कभी खत्म नही होती । जिस दिन कोई बंदा संतुष्ट हो जाएगा वह गरीबी रेखा से बाहर हो जाएगा । आज स्थिति यह है सबको छूट चाहिए है यही कमज़ोर नस हमारे नेताओ ने पकड ली है । कितना भी संपन्न हो पर बिजली बिल आधा चाहिए । कोई भी बिल देने मे जान सांसत मे आ जाती है । जितनी छूट मिल सके बस उसका ही इंतजार रहता है । कौन संपन्न है तो पता चल जाएगा देश मे कितने गरीब है । जब लाखो की संख्या मे हर साल कार बिकती है महंगी वाली बाईक मोबाइल का बाजार है । विश्व का बहुत बडा बाजार है सब यहां आकर्षित हो रहे है । कैसे लोग है जहा गरीब इतने है इसके बावजूद यह बाजार बना हुआ है । यह वह देश है जहा विजय माल्या ललित मोदी आदि उधोगपती गरीबी के कारण ही लोन न पटा पाने के कारण विदेश चले गए है । सबकी गरीबी की परिभाषा अलग अलग है । इसलिए यह राजनीतिक दल भी उन्हे सहयोग देते रहते है । इतना तय है यह देश कितना भी संपन्न हो जाए कितनी भी इकोनॉमी ग्रो कर ले पर यहां के लोगो की मानसिक गरीबी कभी भी खत्म नही होगी । जिस दिन राष्ट्र धर्म व देश के लिए अपने कर्तव्य याद आऐंगे तो कोई गरीब नही दिखाई देगा ।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ





