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राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवाओं ने सत्ता पर आसीन मंत्री के बेटे पर लगाया जमीन हड़पने का आरोप, क्या है मामला…किस मंत्री के बेटे पर लगे गंभीर आरोप.. देखिए ये खास रिपोर्ट

सोनू केदार अंबिकापुर – जब आदिवासी गरीब को सत्ताधारी अपना रसूक दिखा कर पैतृक जमीन को छल कपट से खरीदी कर ली जाए तो क्या। ऐसा आरोप राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवाओं ने सत्ता पर आसीन मंत्री के बेटे पर लगाया गया है जिसकी शिकायत फरियादी पहाड़ी कोरवा ने जिला प्रशासन से की है। क्या है मामला…किस मंत्री के बेटे पर लगे गंभीर आरोप.. देखिए ये खास रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के मंत्री अमरजीत भगत के बेटे पर जमीन खरीद फरोख्त का आरोप लगाया गया है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र माने जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजति के पहाड़ी कोरवाओं ने मंत्री जी के बेटे पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि बिना जानकारी के उनके पिता को छल कपट कर घर से उठा लिया गया और रजिस्ट्री करा ली गई।

दरअसल ये मामला जशपुर जिले के गुतुकिया हर्रापट ग्राम का है। गौरतलब है कि जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यंत गरीबी और कठिनाई पूर्वक अपनी पुस्तैनी जमीन पर कृषि कार्य कर जीवन यापन कर रहे पहाड़ी कोरवा को सत्ता का रसूख दिखा कर जमीन को अपने नाम करा ली गई। फरियादी का आरोप है की मनोरा तहसील अंतर्गत उनकी 24 एकड़ 88 डिसमिल पुस्तैनी जमीन को खरीदी कर ली गई है जिसकी जानकारी हमें नहीं है सुनिए वीडियो में क्या कहते है पीड़ित परिवार।

इस मामले में जिले के क़ानूनी सलाहकार राम प्रकाश पाण्डेय का कहना है कि धारा (170 ख) सभी पर लागू होता है, संविधान की पांचवी अनुसूची में जशपुर जिला शामिल है यहाँ अनुसूचित जनजति कृषि भूमि के क्रय- विक्रय पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा हुआ है अगर कोई आदिवासी किसी आदिवासी से जमीन खरीदता है तो सक्षम अधिकारी के परमिशन लेना जरुरी होता है, यहाँ यह भी देखना पड़ता है की जो जमीन बेच रहा है उसके पास खेती करने के लिए और जमीन है की नही।

दूसरा पहलु यह है की कोई भी शासकीय कर्मचारी कोई सम्पति अर्जित करता है तो इसका परमिशन अपने उच्य अधिकारियो से लेना पड़ता है। इस मामले में जशपुर कलेक्टर महादेव कावरे ने बतया की जमीन खरीदी बिक्री को लेकर पहाड़ी कोरवाओं से एक शिकायत मिली है, जाँच कर मामले में कार्यवाही की जाएगी।

वही प्रदेश के सत्ताधारी खाद्य मंत्री अमरजीत भगत अपने बेटे पर लगे आरोपी को निराधार बताया है उन्होंने इस मामले को विपक्ष के ओर से बदनाम करने की साजिश बताते हुए कहा की भारत के कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति कही भी जमीन खरीद बेच सकता है।

आदिवासी परिवार के कमाने खाने का जरिया महज उसकी जमीन थी लेकिन छल कपट कर उस जमीन की खरीद फरोख्त कर ली गई अब पीड़ित परिवार जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है वही मंत्री जी इस मामले को विपक्ष की साजिश बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे है बहरहाल न्याय की तलाश में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र भटक रहे अब देखना होगा क्या और कब इन पहाड़ी कोरवाओं को इंसाफ मिलेगा या इनका ये मामला ठंडे बस्ते में बंद हो जाएगा।

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