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सरगुजा के देवगढ़ में है अद्भुत शिवलिंग स्थापित, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने भी किया है शोध, इस महादेव की महिमा है निराली

महाशिवरात्रि यानी देवादि देव महादेव की आराधना का पर्व.. महाशिवरात्रि का पर्व महादेव के भक्तों के लिए बेहत खास होता है। माना जाता है कि इस दिन महादेव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था.. वैसे तो प्रदेश भर में कई प्राचीन मंदिर है जहां अद्भुत शिवलिंग स्थापित है लेकिन हम बात कर रहे हैं सरगुजा जिले से महज़ 40 किलोमीटर दूर स्थित देवगढ़ धाम कि जहां संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने भी शोध किया है। देखिए ये महादेव की महिमा पर ये खबर…

सरगुजा की गंगा कही जाने वाली रेण नदी के किनारे स्थित देवगढ़ धाम कभी गौरवातित इतिहास के मिट्टी में दफ़न था। यह धाम सन् 1943 में अपने अस्तित्व में आया जब ग्राम जमगला के निवासी विद्या दास वैष्णों का सपने में शिवलिंग गड़ा हुआ दिखाई दिया। गांव वालों के सहयोग से मिट्टी की खुदाई की गई। करीब चार फिट की गहराई में शिवलिंग दिखाई दिया जिसमें एक जीवित दूध नाग लिपटा हुआ था। प्राचीन और दुर्लभ इस शिवलिंग को अर्धनारीश्वर गौरी शंकर द्वादश ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। महादेव ग़ौरी के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। लोगों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा से इस दरबार में जो मांगों वो मुरादें पूरी होती है…

सरगुजा प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण जिला है। इस जिले को प्राचीन काल में दण्डकारण्य नाम से जाना जाता था.. यह ऋषि मुनियों और देवी देवताओं का पावन तपोवन स्थल रहा है। प्राचीन काल में भृगुवंश के महर्षि जमदग्नि का शतमहला आश्रम था, जहां छात्रों को ज्ञान, विज्ञान,कला और आध्यात्म की शिक्षा देते थे। ऋषि जमदग्नि की पत्नी रेणुका थी उनके पास एक कामधेनु गाय थी। कामधेनु गाय और शतमहला को हथियाने के लिए राजा सहस्त्रार्जुन ने आक्रमण कर ऋषि जमदग्नि की हत्या कर दी.. ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र परशुराम ने पिता के हत्यारे सहस्त्रार्जुन को परस्त करने के लिए तपस्या कर भगवान भीम शंकर को प्रसन्न कर पाशुपत अस्त्र प्राप्त कर सम्पूर्ण क्षत्रिय वंश का नाश भी कर दिया पौराणिक कथाओं में किंवदंती मिलती है।

शिव भक्ति से अनंत शक्ति..त्याग, तपस्या और तपोवन के नाम से जाना जाने वाला सरगुजा प्राकृतिक सौंदर्य परिपूर्ण हैं। बताया जाता है रहस्यमय देवगढ़ धाम और अद्भुत शिवलिंग की जानकारी मिलते ही सरगुजा के पहले कलेक्टर राम बिहारीलाल श्रीवास्तव ने मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर निर्माण पूर्ण होते ही कलेक्टर को कमिश्नर पद पर प्रमोशन हो गया। देवगढ़ धाम के अर्धनारीश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से हर मनोकामना पूर्ण होती हैं।

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