
सोनु केदार अम्बिकापुर – सरगुजा संभाग में एक बार फिर धान का मुद्दा गरमा गया है। जहां भौतिक सत्यापन के बाद करोड़ो रूपये के धान के शॉर्टेज होने का मामला सामने आया है। वह इस मामले के सामने आने के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने समिति केंद्र प्रभारियों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करने के निर्देश दिए है। इधर समिति केंद्र प्रभारियों ने निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
वीओ- सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और कोरिया जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में 15 करोड़ रुपये का धान शॉर्टेज हो गया है। भौतिक सत्यापन के बाद इस मामले का खुलासा हुआ है। प्रति क्विंटल 1 हजार 8 सौ 65 रुपये के हिसाब से धान की कीमत 14 करोड़ 91 लाख 90 हजार 675 रुपये की होती है। वही इस मामले के सामने आने के बाद सहकारी केंद्रीय बैंक प्रबंधन द्वारा ऐसे उपार्जन केंद्रों की विशेष आडिट और वसूली के अलावा एफआइआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा चारों जिले के नोडल अधिकारी और शाखा प्रबंधकों को पत्र प्रेषित कर नियमानुसार कार्रवाई कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।बता दें कि खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और कोरिया जिले में धान का बंफर उत्पादन हुआ। समर्थन मूल्य के अलावा बोनस के कारण धान का रकबा भी बढ़ा था और खरीदी के पहले दिन से ही समितियों में धान की आवक भी शुरू हो गई थी। धान खरीदी पूर्ण होने के बाद समितियों से संग्रहण केंद्र से उठाव व कस्टम मिलिंग का काम चल रहा है।
उपार्जन केंद्रों द्वारा खरीदे गए धान के मिलान और भौतिक सत्यापन के बाद चारों जिले में अप्रत्याशित कमी सामने आई है। चारों जिले में पहली बार 79 हजार 995 क्विंटल धान कम पाया गया है। इससे जिला सहकारी केंद्रीय बैंक प्रबंधन भी हैरत में है। अभी तक इतनी अत्यधिक मात्रा में धान की कमी कभी नहीं हुई थी।
वहीं इस मामले के सामने आने के बाद चारों जिले के समिति प्रबंधक लामबंद हो गए हैं। समिति प्रबंधकों का कहना है कि समय पर घान का उठाओ नहीं होने की वजह से ऐसी स्थिति निर्मित हुई है। समिति केंद्रों में बफर स्टॉक से ऊपर धान जाम होने के बाद भी धान का उठाव नहीं किया गया। जिसका ठीकरा अब समिति प्रबंधकों पर फोड़ा जा रहा है।
वहीं नियमों का हवाला देते हुए समिति प्रबंधकों ने कहा कि बंपर लिमिट से ऊपर धान जाम होने के बाद 72 घंटे के भीतर धान का उठाव हो जाना चाहिए था। बावजूद इसके प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। यही नहीं समिति प्रबंधकों का यह भी कहना है कि कई समिति केंद्रों में अभी घान जाम पड़ा है। वही बारिश के मौसम में धान भीग कर खराब हो रहा है। जबकि धान का उठाव कराने के बजाए समिति केंद्र प्रभारियों पर एफ आई आर दर्ज करने का निर्देश जारी किया गया है। इस मामले में समिति केंद्र प्रभारियों ने सरकार से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।



