
सोनु केदार अम्बिकापुर – मंजिलें उन्ही को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है. पंखो से कुछ नहीं होता हौसलों से उडान होती है मदर्स डे पर हम आपको एक ऐसी माँ के संघर्ष की कहानी बताने जा रहे है जो अनपढ़ होते हुए भी मजदूरी कर अपनी दोनों बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष में लगी देखिए ये खबर
फ्लाईएश ईटभट्ठे पर काम कर रही ये माँ पेशे से मजदूर है.. सीतापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पेटला की रहने वाली माँ तेरसा एक्का मजदूरी कर अपनी दोनों बेटियों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही यही वजह है की आज़ इनकी दोनों बेटियां इंटरनेशनल बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं… गांव के इन दोनों बेटियों ने. अभाव में रहने के वावजूद खेल प्रतिभा में अपना लोहा मनवाया और इंटरनेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में पेरिस तक खेल कर आई हैं।

बता दें कि शबनम शासकीय कस्तूरबा स्कूल से खेल प्रतिभा के हुनर की वज़ह से शासकीय साई खैल परिसर तक पहुंचीं…आज निशुल्क प्राइवेट स्कूल में शिक्षा ले रही है..शबनम और नीतु अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी माँ को देते नहीं थकते जब भी घर आते है तो दोनों बहने अपनी माँ के साथ मजदूरी कर अपनी माँ हाथ बटाते है।
बेटियां बेटों से कम नहीं, आदिवासी परिवार में पैदा हुए लेकिन मां के सपोर्ट ने खेलने और पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जिसकी वज़ह से नीतू एक्का इंडिया टीम की ओर से आस्ट्रेलिया खेल चुकी हैं। अपनी इस उपलब्धि के पीछे अपनी मां और अपने गुरु को श्रेय देती हैं। नीतू ने बताया कि उनकी मा नहीं पढ़ी है लेकिन उनको खेलने पढ़ने में हमेशा सपोर्ट किया है जिसकी वजह से ये मुकाम हासिल हुआ है।
बहरहाल तेरसा जैसी माँ के जज्बे को सलाम जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी,, और यही कारण है कि आज उनकी दोनों बेटियां अंतर्राष्ट्रीय खेलों में अपनी शौर्य दिखला रही है,, और सरगुजा के साथ साथ देश के नाम को भी रोशन कर रही हैं।




