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विशेष लेख – बेरोजगारी हर जगह व्याप्त पर ये बिजनेस चलेगा बिना किसी झंझट के…डॉ. चंद्रकांत रामचंद्र वाघ

अभी युवा काफी बेरोजगारी से जूझ रहे है । नौकरी नहीं है वही वयवसाय भी नहीं है । पर कम लागत मे बगैर कुछ किये यह काफी आय देने वाला उधोग है । जिस तरह डिटेकटिव एजेंसियां काम करती है बस उसी तर्ज पर काम करना है। आपके पास दोनों तरफ के ग्राहक आयेंगे। एक बार बाजार मे आपकी साख बैठ गई तो आपकी तो पौ बारह है । इसमें कई क्लाइंट स्वंय होकर जो सामने नहीं आना चाहते उनके लिए वे सबेरे सबेरे ही घर पहुँच जाए तो कोई आश्चर्य नहीं। आप अपना आफिस अगर बदबूदार जगहों मे या किसी स्लम एरिया भी रखे तो भी व्यवसाय मे कोई विशेष फर्क नहीं पडेगा। उल्टा यह सुविधा संपन्न लोगों को यह जगह ज्यादा अनुकूल लगेंगी। आप समर्पित होकर काम करेंगे तो कोई आपकी सफलता को रोक नहीं सकता। उल्टा रोकने वाले ही आपके साथ सवार हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं। बस नालायको को इस रेस मे पुरुस्कार मे बनाए रखना और दिलाने की महती जिम्मेदारी भर आपकी है ।आप अपने मेहनताना बताइए उससे कम बिलकुल नहीं ज्यादा ही आपको मिलेगा। कई बार क्या अधिकतर बार भी ऐसे ग्राहक टकरायेंगे जो आपकी पूरी फीस देने के बाद भी सम्मान निधि भी फीस के अलावा भी दे देंगे। कुछ लोग तो इतने दिलदार उपभोक्ता मिलेंगे कि मिलने वाली शाल और श्री फल भी आपको समर्पित कर देंगे। एक दिन ऐसा आयेगा आपके यहा से सम्मान के लिए सामान जावेगा और चढावे के बाद फिर आपके ही पास वापस आयेगा । डबल डेकर की दुकान हो जाएंगी। कुछ दिनों में तो ऐसी ख्याति हो जाएंगी कि सम्मान के सभी सामान हमारे यहां उपलब्ध है इसमें हमने तकलीफ से बचाने के लिए हमने सम्मान लेने वाले लोगों की भी उपलब्धता भी रहेगी जो उनके संपर्क में रहते है । वैसे ऐसे लोगों को लोगों को खोजने मे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । फिर विश्वसनीय भी नहीं रहते कई बार पैसा का फटका पड जाता है और काम भी नहीं होता। पैसे जाने का कोई दुख नहीं रहता पर काम नहीं होता उसका ज्यादा अफसोस होता है। फिर यहां पूरी सुविधा विश्वसनीय रूप से मिले तो कोई बाहर क्यो जाऐगा। वैसे ही शाल भी सोनपापडी जैसे ही घूमकर वापस आते रहेंगी। कुछ समय के लिए किराये के टटटू भी रखने पडेंगे जो कमजोर वयक्ति के लिए माहौल बनाने का काम करेंगे। एक बात और इस धंधे में कोई रिस्क भी नहीं है यहां काम न होने पर कोई बंदा पैसा वापस देने की मांग नहीं करेगा। क्योकि अपनी बात सार्वजनिक करने की हिम्मत नहीं करेगा। वहीं आप यह भी कह सकते हैं कि आपसे भी अक्षम इसका हकदार होगा हमको क्या मालूम था। आओ इस व्यवसाय को विश्वसनीयता से जमाकर कमजोर लोगों के साथ न्याय हो सके इस पवित्र उद्देश्य से इस काम को चालू करने का पवित्र व्यवसाय की स्थापना की जा सकती है। इस की आगे चलकर दूसरे जगह भी मांग आने लगेगी। बस आपको किसी भी अभिमन्यु को यह चक्रव्यूह से निकलने नहीं देना है तभी आप तब तक सफल होते रहेंगे। ध्यान रखे यह पैसे वाले या पहुंच वाले सम्मानीय ग्राहक का काम किसी भी कीमत मे होना चाहिए। इसी शुभकामना के साथ। बस इतना ही
डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

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