राजनांदगांव – गणेश पर्व के मौके पर राजनांदगांव शहर की रियासतकालीन पाँच सौ साल पुरानी गणेश मंदिर मे इन दिनो विशेष पूजा अर्चना की जा रही है । भक्त प्रतिदिन सुबह शाम यहाँ भगवान लम्बोदर की पूजा अराधना मे लगे हुए है ।
राजनांदगांव शहर अपनी गौरवशाली अतीत, सुंदर प्रकृति संस्कृति और संसाधनों की बहुतायत को अपने मे समेटा हुआ है ऐसे हि धरोहर को अपने मे सजाये दिग्विजय महाविद्यालय मे स्थापित रियासत कालीन गणेश मंदिर है यह गणेश मंदिर लगभग पाँच सौ साल पुरानी है जिसकी स्थापना मंहत राजाओ ने की है अदभूत आलौलिक छटा मे विराजित भगवान विध्नहर्ता भक्तो को बरबस अपने ओर आकर्षित करती है । ग्यारह दिनो तक चलने वाले गणेश पर्व के दौरान यहां भक्तो का हुजुम उमडा करता है लेकिन इस वर्ष कोरोना काल के चलते मंदिर समिती व्दारा कोविड 19 का पालन करते हुए कुछ हि भक्तो को प्रवेश दिया जा रहा है भक्त यहां सुबह शाम पहुचकर भगवान लम्बोदर की पूजा अराधना मे लगे हुए है यहां के पूजारी लछ्छूदास जी महाराज ने इस मंदिर के इतिहास के सम्बन्ध मे जानकारी देते हुए बताया है कि दिग्विजय महाविद्यालय मे स्थापित गणेश मंदिर मंहत राजाओ के 12 पीठी के पहले की है उनका कहना है कि रियासत कालीन यह मंदिर लगभग पांच सौ साल पुरानी है ।
राजनांदगांव शहर को हाकी और गणेश झांकी रुप मे भी जाना जाता है यहां पर प्रतिवर्ष नयना भिराम गणेश विसर्जन झांकी निकाली जाने की परम्परा है बडी बडी आर्च मे जगमग करती लाईटो के बीच मूविग करती प्रतिमाए गणेश विसर्जन झांकी की विशेषता रही है और हर झांकी मे पौराणिक कथा कहानी को अपने मे समेटे रहती है भक्तगण सालभर से राजनांदगांव मे गणेश पर्व को लेकर पलके बिछाये रहते है ।




