राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को संघ कार्यालय जागृति मंडल में छत्तीसगढ़ और महाकौशल की प्रांत टोली के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान प्रवासी श्रमिक, पर्यावरण, स्वदेशी, ग्राम विकास और सामाजिक समरसता के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई।
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत की जलवायु, भूमि, मान्यताओं और परंपराओं में इतना सामथ्र्य है कि यदि सभी संकल्प कर लेंगे तो भारत को आत्मनिर्भर बनाने में कोई कठिनाई नहीं होगी। भागवत ने कहा कि देश को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर व्यक्ति और हर समूह को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। हम व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन में जितना योगदान देंगे, देश उतना आगे बढ़ेगा।
आवश्यक बातों को अंगीकार करेंगे तो भारत एक बार फिर विश्व को सही दिशा में प्रेरित करने वाला देश बन जाएगा। स्वाभिमान और स्वावलंबन के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के साथ कुटीर उद्योगों की गुणवत्ता पर बल देने की आवश्यकता है। स्वदेशी के प्रति जनमानस में स्वाभिमान का भाव जगाना होगा।
बैठक में समाज के सहयोग से संघ के द्वारा चलाए जा रहे प्रकल्पों पर चर्चा हुई। कोरोनाकाल में प्रवासी श्रमिकों के लिए स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की गई। इस कार्य में योगदान करने वाले समाज के आम लोगों और संस्थाओं का सहयोग के लिए भी धन्यवाद किया गया। सरकार द्वारा प्रवासी श्रमिकों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाने के लिए स्वयंसेवकों के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया।
जागृति मंडल में लगाया कल्पतरु का पौधा : मोहन भागवत ने रायपुर स्थित प्रांतीय संघ कार्यालय में दुर्लभ औषधी कल्पतरू का पौधारोपण किया। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पर्यावरण सह प्रमुख राकेश जैन, मध्यक्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक दीपक विस्पुते, छत्तीसगढ़ प्रांत प्रचारक प्रेम शंकर सिदार, सह प्रांत संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव, प्रांत प्रचार प्रमुख सुरेंद्र एवं प्रांत पर्यावरण प्रमुख अनिल उपस्थित थे।
भाजपा संगठन महामंत्री साय और सांसद संतोष ने की मुलाकात : मोहन भागवत ने भाजपा के संगठन महामंत्री पवन साय और राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय ने भी मुलाकात की। इस दौरान संगठन के विषयों के साथ अन्य मुद्दों पर चर्चा हुए। साय और पांडेय शनिवार शाम को जागृति मंडल पहुंचे थे। कोरोना संकट को देखते हुए भाजपा और अन्य संगठनों के पदाधिकारियों को बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था।




